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हल के पुनर्बलन सिद्धांत का विस्तृत वर्णन करें?

हल एक ऐसे प्रमुख व्यवहारवादी थे जिन्होंने पेवलव तथा थानृडाइक द्वारा किए गए कार्य तथा उनके प्रतिपादित सिद्धांतों से प्रभावित होकर उन्हीं के अनुसार सीखने या अधिगम के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। हल के इस सिद्धांत का मुख्य तत्व किसी आवश्यकता को दूर करना है। अन्य शब्दों में हम कह सकते हैं कि यदि हमें किसी स्थिति में कोई आवश्यकता महसूस होती है। जिसको हम दूर करना चाहते हैं, तो जो कुछ भी उस छन से पहले अनुभव कर रहे हैं, सब हमारी प्रतिक्रियाओं का प्रतिउत्तरों से संबंधित हो जाता है।
हल ने सीखने की प्रक्रिया और प्रवृत्ति को अत्यधिक व्यवस्थित रूप से समझने और परिभाषित करने का प्रयत्न किया है। हल्के सिद्धांत को हम थार्नडाइक द्वारा निर्मितS–R Bond सिद्धांत का संशोधित रूप भी कह सकते हैं। उन्होंने थार्नडाइक केS-R सूत्र को संशोधित करके स्कोर S-0-R सूत्र बना दिया। इसमेंS=stimulus( उद्दीपक),O=Organism( प्राणी), तथाR= Response ( प्रतिक्रिया या प्रत्युत्तर)
हल का यह मानना था कि भिन्न-भिन्न प्राणी भिन्न-भिन्न उद्दीपकों के भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया में व्यक्त करते हैं जबकि थार्नडाइक के सूत्र यह दर्शाते हैं कि एक उद्दीपक प्रति प्राणी को एक जैसी प्रतिक्रिया ही होती है यह गलत है।

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हल का यह कहना है की उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया के अनुकूलन को ही हम अधिगम या सीखना कह सकते हैं तथा इस प्रकार का अनुकूलन काल समीपता तथा पुनर्बलन के कारण ही संभव है तथा उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया में अनुकूलनस्थापित करने के लिए काल समी पता आवश्यक होती है। हल के अनुसार पुनर्बलन उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके द्वारा किसी भी चालक की संतुष्टि होती है। इसी कारण से हल के इस सिद्धांत को चालक न्यूनीकरण सिद्धांत(Drive reduction theory) के नाम से भी जाना जाता है।
हल के अनुसार जब प्राणी या जीव की कोई आवश्यकता होती है तो उससे उसे तनाव या कष्ट की अनुभूति होती है जिसके फलस्वरूप व आवश्यकता को संतुष्ट करने की कोशिश करता है इसके लिए वह चालकों के द्वारा क्रियाएं करता है तथा इन्हीं क्रिया को प्रतिक्रिया में प्रत्युत्तर कहते हैं। यहां पर आवश्यकता की तीव्रता पुनर्बलन का कार्य करती है तथा पुनर्बलन प्राणी की क्रियाओं में गतिशीलता लाता है परिणाम स्वरूप चालक उद्दीपक पिया जन्म होता है। इसSD के नवीन प्रत्यय को हल्ले पहली बार प्रस्तुत किया।


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हल के सिद्धांत की मुख्य विशेषताएं-
हल के सिद्धांत से संबंधित मुख्य धारणाएं के निम्नलिखित प्रकार है-

  • आवश्यकता का अभाव या कमी अधिकता S-R के बीच संबंधों को पुनर्बलित करती है।
  • इस सिद्धांत की दूसरी धारणा यह है कि पुनर्बलन चालक उद्दीपक पर आधारित होता है।हल का यह भी मानना है की पुनर्बलन लक्ष्य उद्दीपक के उत्पन्न या घटित होने पर निर्भर करता है।
  • हल का मानना है कि पुनर्बलन आदतों के निर्माण के लिए एक आवश्यकता है।
    यह ध्यान देने वाली बात यह है कि आदत शक्ति प्रतिक्रिया क्षमता से अधिक स्थिर नहीं रहती है। यह बदलती रहती है अर्थात प्रतिक्रिया में परिवर्तन होने के कारण ही अनुक्रिया में परिवर्तन होता है। यदि प्रतिक्रिया को पुनर्बलन नहीं किया जाता तो उसमें अयोध्या बाधा उत्पन्न होती है जो की आदत निर्माण में बाधा पहुंचाती है।
    हल के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व
  • यह सिद्धांत आदत निर्माण के संबंध में विस्तृत एवं व्यापक व्याख्या प्रस्तुत करता है।
  • यह सिद्धांत पुरस्कार एवं दंड के महत्व को स्पष्ट करता है।
  • यह पुनर्बलन के प्रयोग पर जोर देने के साथ-साथ उनके प्रयोगों की विधि के संबंध में भी विवेचना करता है।
  • इस सिद्धांत की सहायता से आवश्यकता न्यूनीकरण, शिक्षा के उद्देश्यों को बच्चों की आवश्यकताओं से जोड़ने, पाठ्यक्रम का निर्धारण करने तथा लक्ष्य निर्धारण आदि में पर्याप्त सहायता मिलती है।
  • यह सीखने का अधिगम के संबंध को आवश्यकताओं के साथ भली-भांति जोड़ता है जिसके कारण अभिप्रेरणा का महत्व स्वतःस्पष्ट हो जाता है।

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