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Q. सृजनात्मकता क्या है? सृजनात्मक बच्चों की विशेषताएं बताएं?

Ans:- स्किनर के अनुसार” सृजनात्मकता अर्थ है कि व्यक्ति की भविष्यवाणियां नहीं, मौलिक तथा असाधारण होती हैं। सृजनशील व्यक्ति वह है, जो नए क्षेत्रों की खोज करता है, अवलोकन करता है, नई भविष्यवाणियां करता है तथा नए निष्कर्ष निकालता है।”(Vinayiasacademy.com)
स्टैग्नर के अनुसार” किसी नई वस्तु का पूर्ण या आंशिक उत्पादन सृजनात्मकता है”
आइजैक के अनुसार” सृजनात्मकता वह योग्यता है, जिसके द्वारा नए संबंधों का ज्ञान होता है तथा इसकी उत्पत्ति में चिंतन के परंपरागत प्रतिमानों से हटकर असाधारण विचार उत्पन्न होते हैं”
इन सभी परिभाषा के आधार पर हम सृजनात्मकता की विशेषता का निम्नलिखित रूप से उल्लेख भी कर सकते हैं-(Vinayiasacademy.com)
1) सृजनात्मकता सार्वभौमिक होती है अथवा यह सभी प्राणियों में होती है, किसी में अधिक और किसी में कम|
2) सृजनात्मकता योग्यता प्रशिक्षण तथा शिक्षा द्वारा विकसित की जा सकती है|
3) सृजनात्मक अभिव्यक्ति द्वारा किसी नई वस्तु को उत्पन्न किया जाता है, परंतु यह जरूरी नहीं कि वह वस्तु पूर्ण रूप से नई हो।
4) सृजनात्मक प्रक्रम से जो उत्पादन होता है वह मौलिक होता है।
5) सृजनात्मकताऔर बुद्धि से अधिक संबंध नहीं है।
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अत: हम यह कह सकते हैं कि सृजनशीलता वह मानसिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने वातावरण को इस प्रकार बल देना चाहता है कि उसमें व नए विचार नमूने अथवा संबंध उत्पन्न कर सकें। सृजनशीलता मौलिक कार्य करने की क्षमता है या जिससे हम पुराने अनुभवों को पुनः निर्मित करके नई रचना करने की उपयोगी योग्यता कह सकते हैं।
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सृजनशील बालकों की विशेषताएं-

  1. सृजनशील बालकों में विरोध को सहने की अधिक क्षमता होती है।
  2. सृजनशील बालक एक स्वच्छ एवं आत्म सिद्धि करने वाला होता है।
  3. सृजनशील बालक का ज्ञान एवं अस्पष्ट वस्तुओं औसृजनात्मकता क्या है? सृजनात्मक बच्चों की विशेषताएं बताएं?
    (Vinay iss academy.com)
    सृजनशील बालकों की विशेषताएं-
  4. सृजनशील बालकों में विरोध को सहने की अधिक क्षमता होती है।
  5. सृजनशील बालक एक स्वच्छ एवं आत्म सिद्धि करने वाला होता है।
  6. सृजनशील बालक का ज्ञान एवं अस्पष्ट वस्तुओं और विचारों से भय नहीं खाते।
  7. सृजनशील बालक तक्षण कार्य करने में सक्षम होते हैं।
  8. उनके विचारों में एक प्रकार का प्रभाव रहता है जो बिना किसी प्रयास के स्वयं ही चलता रहता है।
  9. उनमें उच्च स्तर की कार्य शक्ति अधिक होती है।
  10. सृजनशील हास्यपद विचारों वाले बालक होते हैं।
  11. उनके द्वारा किए गए कार्य एवं उत्पादन मौलिक होते हैं।
  12. उनमें सृजनात्मक प्रयासों पर आग्रह पूर्वक अटल रहने की शक्ति होती है।
  13. सृजनशील बालकों में अंतर्दृष्टि की शक्ति अधिक होती है।(Vinayiasacademy.com) सृजनात्मकता की प्रक्रिया
    यह क्रिया चार अवस्था में से गुजरती है-
  14. तैयारी – इस अवस्था में समस्या पर गंभीरता से कार्य आरंभ किया जाता है। मानसिक स्तर पर समस्या को समझा जाता है और विभिन्न कल्पनाएं बनाई जाती है। उदाहरण के तौर पर अब लिखने के लिए उससे संबंधित सारी सामग्री इकट्ठा करता है।
  15. उदभवन- इस अवस्था में एकत्रित की गई सामग्री मन के अर्थ चेतन स्तर पर घूमती है और समस्या को हल करने की क्रिया चलती रहती है। इस अवस्था में बकरियां बंद हो जाती है समस्या के समाधान से संबंधित विचार अचेतन मन से चेतन मन में आने का प्रयास करते रहते हैं।
  16. प्रकाश- किस अवस्था में चिंतक अचानक समस्या के समाधान अनुभव करता है। कभी-कभी चिंतक सपने में ही समाधान का रास्ता देख लेता है।(Vinay iasacademy.com)
  17. पड़ताल- इस अवस्था में समस्या के प्राप्त समाधान की जांच पड़ताल की जाती है और अन्य स्थितियों में लागू किया जाता है। यदि समाधान ठीक नहीं है तो दोबारा समस्या के समाधान के लिए और निरंतर प्रयास किए जाते हैं।
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