Public Adm. – Vinay IAS Academy https://vinayiasacademy.com Rashtra Ka Viswas Thu, 20 Aug 2020 13:01:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3.4 नीति आयोग व इसके कार्य https://vinayiasacademy.com/?p=2998 https://vinayiasacademy.com/?p=2998#respond Thu, 20 Aug 2020 13:01:09 +0000 https://vinayiasacademy.com/?p=2998 Share itनीति आयोग क्या है? इसके क्या कार्य है ? इसका गठन कब किया गया? vinayiasacademy.com नीति आयोग नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया ,इसका गठन 1 जनवरी 2015 को हुआ। यह मुख्य रूप से से नीति बनाने वाली एक संस्था है, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्र का समेकित विकास कैसे हो इस पर विचार करती […]

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नीति आयोग क्या है? इसके क्या कार्य है ? इसका गठन कब किया गया?

vinayiasacademy.com नीति आयोग नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया ,इसका गठन 1 जनवरी 2015 को हुआ। यह मुख्य रूप से से नीति बनाने वाली एक संस्था है, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्र का समेकित विकास कैसे हो इस पर विचार करती है।vinayiasacademy.com यह सहकारिता संघवाद की संकल्पना को भी विकसित करती है। जिसमें ग्रामीण स्तर से लेकर शहरी स्तर तक विकास की योजनाएं लागू कैसे होनी चाहिए ?इसके लिए कार्य करती है यह राज्य को निर्देश देती है कि वह जन कल्याणकारी योजना एवं राज्य के नीति निदेशक तत्व को लागू करें ।लंबे समय तक की योजना बनाना जैसे कि 15 वर्ष तक का अथवा 7 वर्षों तक का एक ठोस योजना जो मुख्य रूप से आम जनता तक पहुंच पाए। यह नीति आयोग के मुख्य कार्य है जैसे कि डिजिटल भारत की संकल्पना, अटल इनोवेशन मिशन, मेडिकल संबंधी खोज, कृषि सुधार, जल संसाधन प्रबंधन,। प्रधानमंत्री इसके चेयरपर्सन होते हैं ।इसमें एक उपाध्यक्ष का पद होता है एवं एक सीईओ का पद होता है। इसके अलावा गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री इसके पदेन सदस्य होते हैं ।सभी राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली एवं पांडिचेरी के मुख्यमंत्री भी इसके सदस्य होते हैं। सभी केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल भी के सदस्य होते हैं ।

vinayiasacademy.com इसके भारत के बड़े और टॉप विश्वविद्यालय के कुलपति भी इसके सदस्य होंगे ।शोध संस्थान के भी सदस्य इसके सदस्य होंगे इसमें एक सीईओ एवं चार पदेन सदस्य होते हैं तथा दो पार्ट टाइम सदस्य के रूप में रहते हैं। नीति आयोग का मुख्य कार्य राष्ट्रीय एकता को आगे बढ़ाना और इसमें राज्य कैसे शामिल हो इसे देखना है। सामाजिक संघवाद और सहयोगी संघवाद की अवधारणा को पूरे भारत में विकसित करना है। किसी भी राज्य स्तर का कार्यक्रम ग्रामीण स्तर में कैसे हो, गांव का विकास कैसे हो, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देना ,राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना ,आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े और गरीब लोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना ,लंबे समय के लिए नीतियों का निर्धारण करना ,नए-नए खोज करना ,शोध करना, ज्ञानवर्धक टॉपिक पर चर्चा करना ,एक सुशासन की व्यवस्था हो ,सफलता कैसे मिले इस पर विचार करना ।सुशासन को इंटरनेट के माध्यम से तैयार करना, नए-नए ऐसे उपाय खोजना जिससे सरकार की चलाई जाने वाली योजना धरातल तक पहुंच जाएं नीति आयोग का मुख्य उद्देश्य हैvinayiasacademy.com


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राष्ट्रीय विकास परिषद के कार्य https://vinayiasacademy.com/?p=2996 https://vinayiasacademy.com/?p=2996#respond Thu, 20 Aug 2020 12:57:28 +0000 https://vinayiasacademy.com/?p=2996 Share itराष्ट्रीय विकास परिषद के क्या कार्य है ? इसका गठन कब हुआ ? इसके सदस्य कौन होते हैं ? इसका उद्देश्य क्या है? राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन 1952 ईस्वी में हुआ। इसे गैर संवैधानिक संस्था कहते हैं क्योंकि मूल संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सरकारिया आयोग ने अपनी सिफारिश में यह […]

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राष्ट्रीय विकास परिषद के क्या कार्य है ? इसका गठन कब हुआ ? इसके सदस्य कौन होते हैं ? इसका उद्देश्य क्या है?


राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन 1952 ईस्वी में हुआ। इसे गैर संवैधानिक संस्था कहते हैं क्योंकि मूल संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सरकारिया आयोग ने अपनी सिफारिश में यह कहा था कि इसे संवैधानिक आयोग की तरह देखा जाना चाहिए और इसकी अनुशंसा भी किया था ।यह बताया था जिसका नाम राष्ट्रीय आर्थिक और विकास परिषद रखा जाए लेकिन सरकार ने इसे उसी रूप में रहने दिया जिस रूप में या पहले से संविधान में था ।यानी कि गैर संवैधानिक संस्था। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं ,1967 ईस्वी से मंत्री मंडल के सभी सदस्य भी इसके सदस्य होते हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री ,केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री ,अगर है तो अथवा प्रशासक और योजना आयोग के सदस्य भी इसके सदस्य होते हैं ।इसका मूल उद्देश्यों को सहायता करना है कि राज्य विकास कैसे करें ,एवं राज्य में जो संसाधन दिया गया, उस संसाधन का प्रयोग कैसे करें ?इसका यह भी काम है कि पूरे भारत के प्रत्येक क्षेत्र का चाहे वह पर्वतीय राज्य ,मरुस्थलीय राज्य, आर्थिक रूप से पिछड़ा राज्य ,आर्थिक रूप से विकसित राज्य ।

सभी राज्यों में एक जैसा विकास होना चाहिए। किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। आर्थिक नीति सभी राज्यों के लिए एक जैसी हो पूरे देश के लिए योजना बनाना, योजना आयोग जो योजना को बनाती है उसके लिए योजना को निर्देशन देना। संसाधन का आकलन करना ,संसाधन का प्रयोग कैसे किया जाएगा यह बताना संसाधन को बेहतर रूप से प्रयोग कर सकते हैं यह भी बताना। उद्देश्य प्राप्ति कैसे होगा? यह समझाने की कोशिश करना ।जब योजना आयोग की योजना को प्रारूप तैयार करती है ।वह प्रारूप केंद्रीय मंत्रिमंडल को दिया जाता है और केंद्रीय मंत्रिमंडल से राष्ट्रीय विकास परिषद को दे देती है ।राष्ट्रीय विकास परिषद जब पूरी योजना को अच्छे प्रकार से अध्ययन कर लेते हैं तथा उसमें संसाधनों के प्रयोग को लिखते हैं तो फिर फिर इसके बाद इसे संसद में रखा जाता है। संसद की स्वीकृति अगर मिल जाती तो अधिकारिक रूप से योजना लागू हो जाता है सही मायने में राष्ट्रीय विकास परिषद वह संस्था है जो योजना आयोग को योजना बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैvinayiasacademy.com


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योजना आयोग का गठन https://vinayiasacademy.com/?p=2994 https://vinayiasacademy.com/?p=2994#respond Thu, 20 Aug 2020 12:54:19 +0000 https://vinayiasacademy.com/?p=2994 Share itयोजना आयोग का गठन कब किया गया था? योजना आयोग किस प्रकार की संस्था है? योजना आयोग के सदस्य कौन होते हैं ? योजना आयोग में कितने विभाग हैं ? योजना आयोग का मुख्य काम क्या है ? योजना आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय कहां है ? योजना आयोग में तकनीकी सलाहकार हाउसकीपिंग प्रशासनिक विभाग […]

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योजना आयोग का गठन कब किया गया था? योजना आयोग किस प्रकार की संस्था है? योजना आयोग के सदस्य कौन होते हैं ? योजना आयोग में कितने विभाग हैं ? योजना आयोग का मुख्य काम क्या है ? योजना आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय कहां है ? योजना आयोग में तकनीकी सलाहकार हाउसकीपिंग प्रशासनिक विभाग का क्या काम है?

योजना आयोग का उद्देश्य क्या है?vinayiasacademy.com योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को किया गया था ।यह एक सलाहकारी संस्था है ।यह स्टाफ एजेंसी के रूप में कार्य करती है ।यह संवैधानिक संस्था नहीं है ना ही कानूनी संस्था है क्योंकि इसे संविधान के नीति निदेशक तत्व के द्वारा सलाह देने के लिए बनाया गया है ।इसका मुख्य जिम्मेदारी केंद्र और राज्य के बीच संबंध को बेहतर करना ।संसाधनों का प्रयोग बेहतर तरीके से करना समस्या को समझते हुए सही रूप में योजना को लागू करना है। जैसे कि बेरोजगारी बच्चों का शोषण गरीबी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए वर्ग स्वास्थ्य की समस्याएं ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ही योजना आयोग की आवश्यकता महसूस होती है ।चाहे मानव का संसाधन हो या भौतिक संसाधन योजना आयोग का काम दोनों के बीच सामंजस्य बैठाकर पूरे देश में एक जैसी योजना को लागू करने की है ।इसमें जो बाधाएं आती हैं उन्हें दूर करने की योजना आयोग का है ।वह सभी योजना की जांच करते रहे आज के वर्तमान समय में योजना चलाई जा रही है इस को ध्यान में रखकर वर्तमान की योजना तैयार करना ,पर्वत, पठार ,स्थल के लिए अलग-अलग बनाना। योजना आयोग के कार्य में लोगों की सहभागिता कैसे बढ़े समझाना ।राष्ट्रीय सुरक्षा को विकसित करना मानव संसाधन का प्रयोग कहां पर करना है और कैसे करना है, भविष्य में और क्या बेहतर हो सकता है। शुरू से लेकर अंत तक योजना की जानकारी देना।

अचानक महामारी से कैसे रोका जा सकता है ?जीवन स्तर कैसे उठाया जा सकता है जिससे राष्ट्र का विकास होगा? प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं। इसका उपाध्यक्ष कैबिनेट स्तर का होता है, वह कैबिनेट की बैठक में जा सकता है लेकिन वोट नहीं करेगा ।इसका मुख्य काम केंद्रीय मंत्रिमंडल को सारी रिपोर्ट सौपना होता है ।वित्त मंत्रालय और योजना मंत्री के पदेन सदस्य होते हैं। इसमें 4 या 7 सदस्य पूर्णकालिक विशेषज्ञ राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाता है ।इसके मुख्य विभाग है तकनीक हाउसकीपिंग सलाहकार एवं योजना निरीक्षण। विभाग -तकनीक विभाग का काम, योजना निरीक्षण करना, मूल्यांकन करना, हाउसकीपिंग का काम- सामान्य प्रशासन स्थापना शाखा प्रशासन शासन प्रशासन और कार्मिक प्रशिक्षण है सरकार का काम में चार सलाहकार होते ,जो राज्य के विकास के लिए केंद्र के फंड के लिए केंद्रीय मंत्री कोई जानकारी देते हैं पंचवर्षीय योजना में यह सलाह लेते हैं। इसी प्रकार से योजना आयोग का प्रशासनिक विभाग ने योजना आयोग के सचिव प्रमुख व अन्य कर्मचारियों के साथ काम करते हैं, जबकि इसके तकनीकी विभाग का प्रमुख सलाहकार होता है। इसमें आर्थिक सेवा, सांख्यिकी सेवा, इंजीनियरिंग सेवा से संबंधित अधिकारी होते हैं योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को किया गया था या एक सलाह कारी संस्था है यार स्टार्स एजेंसी के रूप में काज करती है यह संवैधानिक संस्था नहीं है ना ही कानूनी।vinayiasacademy.com


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मौलिक अधिकारों से संबंधित विभिन्न सिद्धांत क्या है भारतीय संविधान के परिप्रेक्ष्य में बताइए#vinayiasacademy.com https://vinayiasacademy.com/?p=1017 https://vinayiasacademy.com/?p=1017#respond Thu, 09 Apr 2020 20:52:47 +0000 http://vinayiasacademy.com/?p=1017 Share itमौलिक अधिकार के संबंध में निम्नलिखित सिद्धांत दिए गए हैं पृथक्करणीयता का सिद्धांत ,आच्छादन का सिद्धांत ,अधित्याग का सिद्धांत, भूतलक्षी नहीं , दोहरी जोखिम का सिद्धांत पृथक्करणीयत्ता का सिद्धांत जिसे डॉक्ट्रिन आफ सीवरेबिलिटी भी कहते हैं यदि किसी अधिनियम का कोई भाग असंवैधानिक होता है तो प्रश्न उठता है कि क्या उस पूरे अधिनियम […]

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मौलिक अधिकार के संबंध में निम्नलिखित सिद्धांत दिए गए हैं पृथक्करणीयता का सिद्धांत ,आच्छादन का सिद्धांत ,अधित्याग का सिद्धांत, भूतलक्षी नहीं , दोहरी जोखिम का सिद्धांत
पृथक्करणीयत्ता का सिद्धांत जिसे डॉक्ट्रिन आफ सीवरेबिलिटी भी कहते हैं यदि किसी अधिनियम का कोई भाग असंवैधानिक होता है तो प्रश्न उठता है कि क्या उस पूरे अधिनियम को समाप्त कर दिया जाए या केवल उसके उसी भाग को अवैध घोषित किया जाए जो संविधान के लिए तर्कसंगत नहीं है उच्चतम न्यायालय ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए कहा कि यदि किसी अधिनियम का कुछ भाग अलग है और वह तर्कसंगत नहीं तो उसके शेष भाग से बिना विधानमंडल के आशय के अधिनियम के मूल उद्देश को समाप्त किए बिना अलग किया जा सकता है जिससे मूल अधिकारों से असंगत वाला भाग ही अवैध होगा ना कि पूरा अधिनियम अवैध होग आच्छादन का सिद्धांत जिसे डॉक्ट्रिन ऑफ़ एक्लिप्स भी कहते हैं इसका अर्थ है कि अनुच्छेद 13 के उपखंड एक पर आधारित है अनुच्छेद 13 के 1 के अनुसार संविधान पूर्व विधियां संविधान लागू होने पर उस मात्रा तक अवैध , जिस तत्व मूल अधिकारों से असंगत ऐसी विधियां प्रारंभ से ही समाप्त नहीं होती बल्कि अधिकारों के प्रवर्तित हो जाने के कारण वे मृत प्राय हो जाती हैं और उनका परिवर्तन नहीं किया जा सकता है यह केवल मूल अधिकार द्वारा आच्छादित हो जाते हैं और सुसुप्त अवस्था में रहते हैं जब जरूरत पड़ती है उस समय इस अधिकार को देखा जाएगा और जब जरूरत नहीं पड़ती है उस समय यह अधिकार सोया हुआ रहेगा

अधित्याग का सिद्धांत डॉक्ट्रिन ऑफ़ वेबर के नाम से भी जाना जाता है कोई भी व्यक्ति संविधान के द्वारा जो अधिकार दिए गए हैं उसे अपनी इच्छा से त्याग नहीं कर सकता है मूल अधिकार केवल व्यक्तिगत हित के लिए नहीं बल्कि जनसाधारण हित के लिए इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जीने का अधिकार दिया गया है तो वह उसे अपनी इच्छा के अनुसार हटा नहीं सकता है
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मूल अधिकार की श्रेणी में अगला सिद्धांत है भूतलक्षी नहीं, जिसे अंग्रेजी में नोट रेट्रोस्पेक्टिव कहा जाता है इसके अनुसार अनुच्छेद 13 का प्रभाव भूत लक्ष्य नहीं है यानी कि संविधान पूर्व बनाए गए कानून प्रारंभिक अवस्था से ही अवैध नहीं होती, मूल अधिकार से असंगत संविधान पूर्व विधियां संविधान लागू होने के बाद ही अवैध होंगी यदि किसी व्यक्ति ने संविधान लागू होने के पहले कोई ऐसा काम किया है जो उस समय किसी विधि के अनुसार अपराध था तो वह संविधान लागू होने पर यह नहीं कर सकता उसे अपराध के लिए दंड नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि संविधान ने ऐसे दंड को हटा दिया है ,इसका अर्थ यह हुआ कि कोई भी अपराध जो किया गया है उस समय हमारा संविधान लागू नहीं हुआ था लेकिन चुकी वह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है तो उसे दंड दिया ही जाएगा
दोहरी जोखिम का सिद्धांत जिसे डॉक्ट्रिन ऑफ़ डबल जिओ पोर्डी कहा जाता है अनुच्छेद 20 के खंड 2 में दोहरी जोखिम का सिद्धांत दिया गया है इसमें ऐसा कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए 1 बार से अधिक दंड नहीं दिया जाएगा किसी व्यक्ति को उन कार्यवाही से उन्मुक्ति प्रदान नहीं करता जो न्यायालय के समक्ष नहीं है अतः न्यायालय द्वारा आयोजित और दोष सिद्ध सरकारी कर्मचारी को उसी अपराध के लिए विभागीय कार्यवाही के अंतर्गत भी दंडित किया जा सकता है इस प्रकार विभागीय रूप से दंडित व्यक्ति पर न्यायालय में अभियोग चलाया जा सकता है#vinayiasacademy.com


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मौलिक अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण बाद एवं संशोधन को बताइए सर्वोच्च न्यायालय ने किस-किस मुकदमे में क्या फैसला दिया# गोलकनाथ केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स मुकदमे की आधार पर मौलिक अधिकारों को बताएं#vinayiasacademy.com https://vinayiasacademy.com/?p=1014 https://vinayiasacademy.com/?p=1014#respond Thu, 09 Apr 2020 20:49:02 +0000 http://vinayiasacademy.com/?p=1014 Share it गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य 1967 ईसवी का मामला है इस के निर्णय से पूर्व दिए गए निर्णय में यह निर्धारित किया गया था कि संविधान के किसी भी भाग में संशोधन किया जा सकता है जिसमें अनुच्छेद 368 तथा मूल अधिकार भी सम्मिलित है लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने गोलकनाथ के मामले में कहा […]

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गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य 1967 ईसवी का मामला है इस के निर्णय से पूर्व दिए गए निर्णय में यह निर्धारित किया गया था कि संविधान के किसी भी भाग में संशोधन किया जा सकता है जिसमें अनुच्छेद 368 तथा मूल अधिकार भी सम्मिलित है लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने गोलकनाथ के मामले में कहा अनुच्छेद 368 में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मूल अधिकार में संशोधन नहीं किया जा सकता है इसका मतलब यह हुआ कि संसद मूल अधिकार में संशोधन नहीं कर सकती है


24 वा संविधान संशोधन 1971 ईस्वी में अनुच्छेद 13 और 368 में संशोधन किया गया और यह निर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 368 में दी गई प्रक्रिया द्वारा मूल अधिकार में संशोधन किया जा सकता है संसद द्वारा इस कानून के बनाने के बाद ताकतवर हो गई संसद और वह मौलिक अधिकार में परिवर्तन भी कर सकती है vinayiasacademy.com
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के निर्णय में इस प्रकार के संशोधन को मान्यता दे दी लेकिन गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य के निर्णय को निरस्त भी कर दिया गया इसमें यह भी बताया गया कि कोई भी संशोधन करते समय मूलभूत ढांचे को नष्ट नहीं किया जाएगा
42वां संविधान संशोधन 1976 ईस्वी के अनुसार अनुच्छेद 368 में खंड 4 और खंड 5 को जोड़ दिया गया इसमें यह बताया गया कि इस प्रकार से किया गया संशोधन को किसी भी न्यायालय में अब प्रश्नगत नहीं किया जा सकता है अर्थात संशोधन को मान्यता मिलना ही है
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ 1980 ईस्वी के निर्णय में यह बताया गया कि संविधान के आधारभूत लक्षण की रक्षा करने का अधिकार न्यायालय को है और न्यायालय इस आधार पर किसी भी संशोधन का पुनर्विलोकन कर सकता है इसके द्वारा 42 वें संविधान संशोधन द्वारा की गई व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया#vinayiasacademy.com


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मूल कर्तव्य क्या है? मूल कर्तव्य को न्यायपालिका से लागू करवाया जा सकता है या नहीं? इसका एक आलोचनात्मक विवरण प्रस्तुत कीजिए?#vinayiasacademy.com# https://vinayiasacademy.com/?p=1010 https://vinayiasacademy.com/?p=1010#respond Thu, 09 Apr 2020 20:44:41 +0000 http://vinayiasacademy.com/?p=1010 Share it जब भारत का संविधान लागू हुआ उस समय संविधान में सिर्फ मूल अधिकार का उल्लेख था मूल कर्तव्य का कोई उल्लेख नहीं था लेकिन 1976 में संविधान में संशोधन करते हुए स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश को अपनाया गया और संविधान के भाग 4 के क मे 10 मूल कर्तव्य की व्यवस्था की […]

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जब भारत का संविधान लागू हुआ उस समय संविधान में सिर्फ मूल अधिकार का उल्लेख था मूल कर्तव्य का कोई उल्लेख नहीं था लेकिन 1976 में संविधान में संशोधन करते हुए स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश को अपनाया गया और संविधान के भाग 4 के क मे 10 मूल कर्तव्य की व्यवस्था की गई 2002 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने को भी एक कर्तव्य जोड़ा गया इसलिए अब 11 कर्तव्य है वह इस प्रकार से हैvinayiasacademy.com

संविधान का पालन तथा उसके आदर्श संस्था और राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान करेंगे, राष्ट्रीय आंदोलन के प्रेरक आर्दश का पालन करेंगे, भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता को बचाने के लिए अपने कर्तव्य को निभाएंगे, देश की रक्षा और राष्ट्र सेवा प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य होगा वह देश की रक्षा करें और बुलाए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें, भारत के सभी भाग में समरसता और एक जैसे भाईचारे की भावना का विकास करना जो धर्म भाषा प्रदेश और वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से अलग हो ऐसी प्रथा का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है इसलिए स्त्रियों की सम्मान का रक्षा करना है और सभी भारतीयों के बीच समरसता का विकास करना है, भारत की संस्कृति की गौरवशाली परंपरा की भी रक्षा करेंगे, प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा सभी प्राणी के प्रति दया का भाव दिखाएंगे इसके अंतर्गत वन्य जीव नदी वन्यजीव सभी लोगों की रक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद और ज्ञान अर्जित करने का विचार धारा का विकास, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना तथा हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देना, व्यक्तिगत रूप से एवं सामूहिक रूप से देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाने के लिए कोशिश करना, 86 वा संविधान संशोधन 2002 के द्वारा अनुच्छेद 51 का में संशोधन करके एक नया प्रारंभिक शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने के उद्देश्य अभिभावकों के लिए यह कर्तव्य निर्धारित किया गया है कि 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करेंvinayiasacademy.com
मूल कर्तव्य को सीधे तौर पर लागू करवाना संभव नहीं है ना ही इसे लागू करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाया जा सकता है इसलिए इसकी आलोचना की जाती है कि इसमें भाषा की आवश्यकता है जैसे कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का क्या अर्थ होगा मानववाद किस हद तक होगा, सुधार की भावना का विकास का अर्थ क्या होगा, जिसमें हर किसी का अलग अलग दृष्टिकोण हो सकता है इसी प्रकार से सभी मूल कर्तव्य को जब पढ़ा जाएगा तो ऐसा लगता है कि यह अत्यधिक आदर्शवादी है, जैसे राष्ट्रीय आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों से लिए गए आदर्श को अपने जीवन में उतारना संस्कृति की परंपरा को बचाना ज्ञान अर्जन का विकास करने के लिए सूचना जो आज के समय में तर्कसंगत नहीं है.

वर्मा समिति के अनुसार मूल कर्तव्य के परिवर्तन के लिए कुछ नियमों को बताया गया है जैसे राष्ट्रीय ध्वज भारतीय संविधान और राष्ट्रगीत के प्रति कोई अवमानना की जाती है राष्ट्रीय सम्मान की अवमानना अधिनियम 1971 के द्वारा कार्रवाई की जाएगी, भारतीय ध्वज संहिता में यह अंकित है कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन में इसके साथ सही ढंग से बर्ताव किया जाए, मौजूदा आपराधिक कानून में कई प्रावधान है जैसे जनसमूह के मध्य धर्म नस्ल जन्मस्थान निवास भाषा जैसी चीजों को प्रोत्साहन नहीं देना है, राष्ट्रीय एकता के लिए आईपीसी की 153 ख के दंडनीय अपराध बनाया गया है, धर्म से जुड़ी आक्रमक गतिविधि आईपीसी की धारा 295 से लेकर 298 के अंतर्गत आती है, नागरिक अधिकार अधिनियम को भी संरक्षण दिया गया है#vinayiasacademy.com


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हमारे राष्ट्रीय प्रतीक जिसमें राष्ट्रध्वज राजचिन्ह राष्ट्रगान राष्ट्रगीत राष्ट्रीय पंचांग राष्ट्रीय पशु राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्र का नाम बताइए#vinayiasacademy.com# https://vinayiasacademy.com/?p=933 https://vinayiasacademy.com/?p=933#respond Mon, 06 Apr 2020 12:57:56 +0000 http://vinayiasacademy.com/?p=933 Share itहमारे राष्ट्रीय प्रतीक जिसमें राष्ट्रध्वज राजचिन्ह राष्ट्रगान राष्ट्रगीत राष्ट्रीय पंचांग राष्ट्रीय पशु राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्र का नाम बताइए#vinayiasacademy.com# राष्ट्रीय ध्वज 3:2 आकार का केसरिया सफेद व हरे रंग का ध्वज जिसके मध्य में नीले रंग का चक्र होता है इस चक्र में चौबीस तीलियां होती है इस ध्वज को संविधान सभा ने 22 […]

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हमारे राष्ट्रीय प्रतीक जिसमें राष्ट्रध्वज राजचिन्ह राष्ट्रगान राष्ट्रगीत राष्ट्रीय पंचांग राष्ट्रीय पशु राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्र का नाम बताइए#vinayiasacademy.com# राष्ट्रीय ध्वज 3:2 आकार का केसरिया सफेद व हरे रंग का ध्वज जिसके मध्य में नीले रंग का चक्र होता है इस चक्र में चौबीस तीलियां होती है इस ध्वज को संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 में अपनाया था
भारत का राज्य चिन्ह सारनाथ वाराणसी में स्थित अशोक की लाट है भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को अपनाया इस लाट के नीचे देवनागरी लिपि में मुंडकोपनिषद से लिया गया सत्यमेव जयते लिखा हुआ है


भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन है जिसे गीतांजलि पुस्तक से लिया गया है इसे रविंद्र नाथ टैगोर जी ने लिखा है इसे भी 1950 में अपनाया गया 27 दिसंबर 1911 को राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में स्वयं रविंद्र नाथ टैगोर ने गाया था इसे पूरा करने में 52 सेकेंड का समय लगता है और इसके सिर्फ पहला और अंतिम तिथि को गाने में 20 सेकंड का समय लगता है
भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी का उपन्यास आनंदमठ से से लिया गया है इसे सबसे पहले कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में 1896 ईसवी में गाया गया था जिसमें अध्यक्ष मोहम्मद रहीम तुल्ला सयानी
भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ-साथ शक संवत चैत्र 365 दिन इसे 22 मार्च 1957 को अपनाया गया
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ एवं राष्ट्रीय पक्षी मयूर राष्ट्र का नाम इंडिया जो कि भारत है#vinayiasacademy.com


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भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं उनके नाम लिखें प्रत्येक अनुसूची में क्या दी हुई है किस अनुसूची को कब जोड़ा गया#vinayiasacademy.com# https://vinayiasacademy.com/?p=924 https://vinayiasacademy.com/?p=924#respond Sun, 05 Apr 2020 12:18:49 +0000 http://vinayiasacademy.com/?p=924 Share itभारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं उनके नाम लिखें प्रत्येक अनुसूची में क्या दी हुई है किस अनुसूची को कब जोड़ा गया#vinayiasacademy.com# जब संविधान को अपनाया गया था उस समय संविधान में 8 अनुसूचियां थी लेकिन वर्तमान में कुल 12 अनुसूचियां है प्रथम अनुसूची में भारतीय संघ के सभी राज्य और संघ शासित प्रदेश […]

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भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं उनके नाम लिखें प्रत्येक अनुसूची में क्या दी हुई है किस अनुसूची को कब जोड़ा गया#vinayiasacademy.com# जब संविधान को अपनाया गया था उस समय संविधान में 8 अनुसूचियां थी लेकिन वर्तमान में कुल 12 अनुसूचियां है
प्रथम अनुसूची में भारतीय संघ के सभी राज्य और संघ शासित प्रदेश का उल्लेख.# द्वितीय अनुसूची में भारतीय राजव्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारी राष्ट्रपति राज्यपाल लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष राज्यसभा के सभापति और उपसभापति विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष विधान परिषद के सभापति और उपसभापति उत्तम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक महान्यायवादी जैसे प्रमुख पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए प्राप्त होने वाले वेतन भत्ता और पेंशन का उल्लेख है इन पदों को संवैधानिक स्थिति प्राप्त.
तीसरी अनुसूची में विभिन्न पद पर जैसे कि राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति मंत्री संसद सदस्य उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद ग्रहण के समय शपथ कौन दिलाएंगे इसकी जानकारी दी हुई है# चौथी अनुसूची में राज्य एवं संघ क्षेत्र के राज्यसभा में किस राज्य के कितने सीट होंगे कितने प्रतिनिधि होंगे इसकी जानकारी# पांचवी अनुसूची में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की विकास के लिए उल्लेख है# छठी अनुसूची में असम मेघालय त्रिपुरा मिजोरम राज्य के जनजाति एवं उत्तर पूर्वी के दूसरे अन्य भाग जनजातियों के प्रशासन के बारे में- सातवीं अनुसूची में संघ सूची राज्य सूची और समवर्ती सूची की जानकारी , इस विषय पर कानून कौन बनाएगा#

आठवीं अनुसूची में 22 भाषा का उल्लेख किया गया है मूल रूप से आठवीं अनुसूची में 14 ही भाषा थी 1967 ईस्वी में सिंधी को 1992 ईस्वी में कोंकणी मणिपुरी और नेपाली को 2003 में 92 वा संविधान संशोधन द्वारा बोडो डोगरी मैथिली और संथाली भाषाओं को आठवीं अनुसूची में रखा गया है# नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन के द्वारा 1951 ईस्वी में जोड़ा गया इसके अंतर्गत राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की कानून का उल्लेख है लगभग 300 अधिनियम इसके लिए बनाए गए# दसवीं अनुसूची 52 वां संविधान संशोधन 1985 में कथा 91 वा संविधान संशोधन 2003 में जोड़ा गया है इसमें दल बदल कानून का उल्लेख है# ग्यारहवीं अनुसूची 1992 ईस्वी में 73 वा संविधान संशोधन से जोड़ा गया है इसमें पंचायती राज व्यवस्था का उल्लेख है इसमें 29 विषय दिए गए हैं# बारहवीं अनुसूची 74वां संविधान संशोधन 1992 से ही जुड़ा है इसमें शहर के स्थानीय शासन की जानकारी है इसमें 18 विषय दिए गए#vinayiasacademy.com


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