परिचय- सुप्रीम कोर्ट ने दो बार आवारा कुत्ते को लेकर अपना फैसला सुनाया है जस्टिस विक्रम नाथ की अगवाई में तीन जजों की पीठ में एक नया फैसला सुनाया जो दिल्ली एनसीआर सहित पूरे देश में लागू हो गया है कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले में संशोधन किया है आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें वापस छोड़ जाएगा सिर्फ हिंसक और आक्रामक कुत्तों को ही सेंटर हाउस में रखा जाएगा कुत्तों के पकड़ने के नगर निगम के काम पशु प्रेमी द्वारा बाधा नहीं डाली जाएगी. सार्वजनिक स्थान के बजाय निर्धारित जगह पर कुत्तों को भोजन देना होगा. कुत्तों को जहां से उठाया है उन्हें इस जगह रीलोकेट किया जाएगा .नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाईन सेवा शुरू की जाएगी.
कुत्तों को लेकर क्या है समस्या- पेट होमलेंसनेस इंडेक्स 2021 के अनुसार भारत में लगभग 6 करोड़ 20 लाख आवारा कुत्ते हैं लेकिन जनगणना के आंकड़े के अनुसार एक करोड़ 40 लाख आवारा कुत्ते हैं. पिछले साल कुत्ते काटने के 37 लाख मामले सामने आए थे .लगभग प्रतिदिन 10000 डॉग बाइट के मामले भारत में आते हैं. मेनका गांधी के अनुसार वर्ष 2024 में रैबीज से होने वाली कुल 54 मौत है. लैंड सेट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना 5700 लोग रेबीज के काटने से मरते हैं. जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक पुरानी रिपोर्ट 2004 में आई थी जिसमें रैबीज से 20565 सालाना मौत हुई थी जो दुनिया का 35 फ़ीसदी है.
सुप्रीम कोर्ट के जज जे बी पारदीवाला और आर महादेवन मौलिक अधिकार और सह अस्तित्व के संतुलन पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए बताया कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड बनाम भारत सरकार 2023 और एनिमल वेलफेयर बोर्ड बनाम ए नागराज 2014 मामले में अनुच्छेद 14 -19 के तहत जानवरों को मौलिक अधिकार हासिल नहीं है. सड़क रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थान में आवारा कुत्तों के आतंक से संविधान के अनुच्छेद 19 एक (d) / 21 में सुनिश्चित जनता की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार को उल्लंघन होता है. एमसीडी कानून 1957 की धारा 399 महाराष्ट्र पुलिस कानून 1968 की धारा 44 ,ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम कानून 1955 की धारा 373 के तर्ज पर सभी स्थानीय निकाय और पुलिस को अधिकार मिले इसके अनुसार उन्हें सार्वजनिक स्थान में आवारा जानवरों की आतंक पर रोक लगनी चाहिए.
भारत में आवारा कुत्तों के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं जिसमें टीकाकरण, नसबंदी अभियान, शेल्टर हाउस ,सड़क पर रोकने के लिए सख्त कानून के चलते अन्य महाद्वीप में ऐसा दिक्कत नहीं होता है .कुत्तों को मारने के लिए कानून में प्रावधान भी होना चाहिए. मनुष्य और जानवरों के साथ अस्तित्व की आदर्शवादी बातों के बीच बच्चों ,बुजुर्ग और सड़क पर रहने वाले गरीब लोगों के जीवन के अधिकार की रक्षा करना, सबसे ज्यादा जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हेल्पलाइन में शिकायत के चार घंटे के भीतर आवारा कुत्तों को नगर निगम द्वारा ले जाया जाएगा .नगर निगम के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ अदालत की अमरनाथ का मामला चलेगा.
केंद्र सरकार ने 2021 में राष्ट्रीय एक्शन प्लान शुरू किया जिसके अनुसार साल 2030 तक देश में रेबीज को समाप्त कर देना है.
निष्कर्ष कुत्तों के काटने के सभी मामलों में फ्री इलाज के साथ पीड़ित व्यक्ति और परिवार को समुचित मुआवजा मिलना चाहिए कुत्तों के काटने के मामले में मालिक और अनुचित संरक्षण देने वालों पर मुकदमा भी होनी चाहिए तभी समाज में सब की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी
चुनौतियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली में कुत्तों की नसबंदी केंद्र हाउस सीसीटीवी माइक्रोचिप वाले स्कैनर आदि की अमल पर लगभग 15000 करोड़ रूपया खर्च होगा जबकि एमसीडी के ऊपर कर्मचारियों का वेतन और ठेकेदार के भुगतान के लिए ही 14000 करोड रुपए की देनदारी है. राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि शेल्टर हाउस बनाए गए तो राज्य का आधा पैसा इसी में खर्च हो जाएगा .देश में 40 फ़ीसदी आवासी पोषक भोजन से वंचित है