झारखंड के 29539 गांव में बैंकिंग व डाक सेवा उपलब्ध है. झारखंड में कुल मिलाकर 29680 गांव को बैंकिंग और डाक सेवायुक्त बनाने के लिए चिन्हित कर लिया गया है. इन गांवों के तीन किलोमीटर के दायरे में बैंक , डाकघर की सुविधा को मानक माना गया है. पूर्वी क्षेत्र के बिहार झारखंड उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में 154851 गांव में लगभग 99% से ज्यादा गांव में इन सेवाओं को पहुंचाया जा चुका है. जिन गांव से बैंकिंग सुविधा 10 किलोमीटर से दूर है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. सभी गांव में पंचायत भवन बनाने की भी शुरुआत हो गई है .नई बैंक शाखा ,टच पॉइंट खोलने के लिए किया जाएगा. बिहार राज्य के 39133 गांव में 3975 गांव में बैंकिंग कवरेज हो गया है. पश्चिम बंगाल में 38250 गांव में 38224 गांव में कवरेज हो गया है. उड़ीसा में 47788 गांव में से 46882 गांव में कवरेज हो गया है. इसमें यह बताया गया है कि बिजनेस कॉरस्पॉडेंट लोगों को सभी आवश्यक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं. यह प्रस्ताव है कि यदि गांव के 3 किलोमीटर के दायरे में एक बिजनेस कॉरस्पॉडेंट आउटलेट है तो एक गांव को कर किया हुआ माना जा सकता है.
सऊदी अरब के दो शहर जद्दा और रियाद में 14 जुलाई से 17 जुलाई तक आम का फेस्टिवल आयोजन हो रहा है .जिसमें झारखंड के आम को भी रखा गया है .ऑल सीजन फार्म फ्रेश संस्था के सहयोग से पाकुड़ और जमशेदपुर से आम भेजा गया है. यह पीडा से झारखंड में केवल इसी संस्था को निर्यात करने का लाइसेंस मिला है. बाजार समिति ने वहां भेजने के लिए प्रक्रिया पूरा कर लिया है. बाजार समिति के अध्यक्ष ने यह जानकारी दिया .पाकुड़ से धरतीआवा जनजाति उसके अभियान के तत्वाधान में बिरसा हरित ग्राम योजना से तैयार आम्रपाली प्रजाति का लगभग ढाई क्विंटल आम भेजा गया है .जमशेदपुर से डेढ़ क्विंटल आम भेजा गया है .जहां पर यह आयोजन होगा उसका नाम लुलु हाइपरमार्केट है. 2021 में पहली बार दुबई और कतर में झारखंड की सब्जी भेजी गई है.
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के अनुसार झारखंड के स्कूल में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के बच्चे पढ़ाई में राष्ट्रीय औसत से बेहतर है .कक्षा 6 क्लास से लेकर 9 में बच्चों का प्रदर्शन सभी विषय में राष्ट्रीय औसत से बेहतर हुआ है.
झारखंड में मनरेगा योजना से ग्रामीण क्षेत्र में लीची का पौधा लगाया जाएगा. यहां का जलवायु लीची के लिए उपयुक्त जलवायु मानी गई है. बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत यह काम शुरू किया जा रहा है. शुरुआत समय में मिश्रित खेती कराई जाएगी .जिसमें किसानों का इनकम शुरू हो जाएगा. उसके बाद लीची आय का एक अच्छा स्रोत हो जाएगा. 5 साल के बाद किसान प्रति हेक्टेयर ₹200000 तक कमा सकेंगे. 10 साल बाद ₹300000 तक कमाई हो सकती है .बाद में मल्टी लेयर खेती से एक हेक्टेयर में 15 साल बाद ₹400000 कमा सकते हैं .झारखंड में मनरेगा से आम का प्लांटेशन पहले ही कराया जाता था. इस कारण खूंटी गुमला सिमडेगा सहित कई जिले में मनरेगा के तहत आम्रपाली आम की वैरायटी लगाई गई थी .इन जिलों में लाखों किसानों को इससे लाभ हो रहा है .मनरेगा के तहत लीची के साथ-साथ अमरुद और इमारती पौधे भी लगाए जाएंगे. इसमें एक एकड़ में 260 पौधा लगाने की योजना है .इस पर लगभग ₹600000 की लागत आएगी. एक एकड़ भूमि पर छह जलकुंड भी बनाए जाएंगे. जमीन पर एक परिवार अधिक से अधिक एक एकड़ और कम से कम 50 डिसमिल जमीन पर फलदार पौधे लगा सकता है .शुरुआती समय में ऐसे जमीन को चिन्हित किया जाएगा जहां साल में एक बार में काम से कम उड़द मड़वा और कुलथी की खेती करते हैं .100 मीटर की दूरी पर सिंचाई का साधन हो

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