दिल्ली में नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2 .0 क्या है? इससे प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जाएगा?
Vinay singh Vinayiasacademy.com
दिल्ली में जो नई इलेक्ट्रॉनिक वाहन नीति लागू हुई है, इसका मुख्य मकसद 31 मार्च, 2030 तक दिल्ली को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। अगले 4 वर्ष में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने करीब ₹150000000000 का भारी निवेश करने का घोषणा किया है। नीति में वाहन की अलग-अलग श्रेणी के लिए कई बड़ा प्रोत्साहन और सख्त टाइमलाइन भी दिया गया है। दिल्ली में रजिस्टर होने वाली ₹3000000 तक की सभी ईवी कार को रोड, टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी छूट दिया जाएगा।
पेट्रोल पर रोक लगाने के लिए 1 जनवरी, 2027 से दिल्ली में केवल ईवी ऑटो रिक्शा ही रजिस्टर किया जाएगा, फिर 1 अप्रैल 2028 से नया पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहन का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। ईवी दोपहिया वाहन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य यह वाहन खरीदने वालों को पहले साल 30000 दूसरे साल 20000 और तीसरे साल ₹10000 की सब्सिडी देने की घोषणा की गई है। इस नीति से आम लोगों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने की रफ्तार तेज हो जाएगी। वाहन से होने वाला प्रदूषण में कमी आएगा तथा इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि यह नीति पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहन से इलेक्ट्रिक वाहन की ओर चरणबद्ध बदलाव का रोडमैप बनाएगी। उद्योग जगत भी दिल्ली सरकार को नई ईवी नीति से खुश करेगी, हालांकि प्रदूषण से मुक्ति के साथ इसका यह भी ध्यान रखना होगा कि नए उपाय से लोगों की आजीविका और रोजी रोजगार प्रभावित नहीं हो। उदाहरण के लिए, गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक की ओर बदलाव श्रमिक केंद्रित होना चाहिए और डिलीवरी कर्मी, गीग वर्कर्स, ऑटो चालक और दुपहिया वाहन पर निर्भर अन्य संगठित श्रमिक को इस बदलाव का अधिक बोझ अकेले नहीं उठाना चाहिए यानी इस नीति के कारण श्रमिक की आय या उनका रोजगार प्रभावित नहीं होना चाहिए।