मिजोरम एवं गोवा के बाद 23 जून को त्रिपुरा देश का तीसरा पूर्ण साक्षर राज्य बना. त्रिपुरा के लगभग 3000 युवाओं ने बिना वेतन और बिना किसी प्रचार के त्रिपुरा को देश का तीसरा पूर्ण साक्षर राज्य बना दिया है. उन्होंने गांव गांव में अशिक्षित की पहचान की फिर उनकी सहूलियत के हिसाब से उन्हें पढ़ाना शुरू किया. हर शाम खेत खलिहान या बाजार से उनके लौटने के बाद स्वयं से व्यक्ति ने उन्हें पढ़ने का जिम्मा लिया .कभी किसी के घर में कभी आंगनवाड़ी में कभी स्थानीय बाजार में पढ़ाया. जिसके कारण मिजोरम की शिक्षा व्यवस्था चेंज हुई है. इस में जो वॉलिंटियर्स थे वह रिटायर्ड कर्मचारी पंचायत सदस्य स्वयं सहायता समूह की महिलाएं शामिल थी

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