झारखंड के टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे का विदेश में बढ़ रहा है मांग. झारखंड में अब टिश्यू कल्चर से पौधा तैयार किया जा रहा है .यह तैयार गुणवत्ता वाले पौधे होते हैं इसके लिए एक उच्च स्तरीय लैब बनाया गया है. यहां तैयार पौधा और विदेश में भी जाने लगा है. पिथोरिया के बालू गांव में शंका एग्रो लैब के तैयार पौधे का पहले विदेशी खेप करीब 1 लाख पौधा नेपाल भेजा गया है. संस्थान के प्लांट में स्थानीय युवा और लड़कियों को टिशु कल्चर में पौध तैयार करना सिखाया गया है. विशेषज्ञ देखने में अत्यधिक विधि और हाइजीन के साथ पौध तैयार किया जाता है. पहले एक बोतल में पौधा तैयार होता है. उसके बाद कॉकपिट या हल्की मिट्टी में प्राथमिक पौधा तैयार होता है. उसके बाद इसको प्लांट कर सेकेंडरी पौधा तैयार किया जाता है. यह प्लांटेशन के लिए तैयार हो जाता है. इस प्रक्रिया में 5 महीना तक का समय लग जाता है. नेपाल का मुक्तिनाथ कंपनी ने पौधे का आर्डर दिया है. टिश्यू कल्चर से बिना मिट्टी के तैयार होता है आलू का बीज. जिसमें आलू की वैरायटी ज्योति चंद्रमुखी हिमालयनि आदि शामिल है