एफसीआरए का नया नियम क्या है? एक समालोचना प्रस्तुत करें, क्या इससे अनुच्छेद 25 का उल्लंघन होगा ?
Vinayiasacademy.com vinay singh
केंद्र सरकार ने विदेशी अनुसंधान विनियमन अधिनियम एफसीआरए के तहत गैर सरकारी संगठन जैसे कि एनजीओ या धर्म के लिए चलाए जा रहे ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान और धार्मिक संगठन के लिए विदेशी वित्तपोषण संबंधी नियम को और कठोर बनाया है और यह पारदर्शी भी है, इसके अनुसार विदेशी धन के उपयोग में जवाबदेह को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल घोषित उद्देश्य के लिए है, पहले एफसीआरए पंजीकरण प्राप्त करने वाले संगठन स्वयं को सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक या आर्थिक गतिविधि से जोड़कर पंजीकरण कराते थे, लेकिन नए नियम के अनुसार अब प्रत्येक संगठन को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह विदेशी धन को उपयोग किस विशिष्ट उद्देश्य के लिए कर रहे हैं। इसे सरकार को जहां धन के उपयोग की निगरानी करने में आसानी होगी वहीं यह सुनिश्चित भी किया जा सकेगा कि विदेशी सहायता का किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं हो, हालांकि कुछ सामाजिक संगठन और लोगों का यह मानना है कि इस नई व्यवस्था से संगठन का कार्यगत लचीलापन तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है, इसके अलावा बदलती सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप योजना में त्वरित परिवर्तन करना भी पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। नए नियम का एक महत्वपूर्ण पहलू भौगोलिक सीमा निर्धारण भी है। अब एफसीआरए पंजीकरण केवल उन्हीं राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के लिए मान्य होगा जिसका उल्लेख आवेदन में किया गया है। यदि कोई संगठन भविष्य में अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करना चाहता है तो उसे फिर से अनुमति लेनी होगी। पहले संगठन अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी तो देते थे लेकिन उनका पंजीकरण किसी विशेष राज्य तक सीमित नहीं होता था। इस बदलाव से सरकार को विदेशी वित्तपोषित गतिविधि की क्षेत्रवार निगरानी करने में सुविधा नहीं मिलती थी। कई राज्यों में कार्य करने वाले संगठन के लिए नई व्यवस्था अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया और चुनौती पैदा करेगी। गृह मंत्रालय ने प्रमुख पदाधिकारी की परिभाषा का भी विस्तार कर दिया है। अब इसमें केवल अध्यक्ष या सचिव ही नहीं बल्कि ट्रस्टी, निदेशक, साझेदार तथा संगठन के संचालन और प्रबंधन का प्रभाव रखने वाले अन्य व्यक्ति को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही नेतृत्वकारी पदों पर विदेशी नागरिक की नियुक्ति को लेकर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी प्रभाव और नियंत्रण की संभावना को कम किया जाएगा, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे नागरिक समाज संगठन की स्वायत्तता पर अंकुश के रूप में देखते हैं। नए नियम की सबसे अधिक चर्चा धार्मिक गतिविधि से संबंधित प्रावधान को लेकर हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक शिक्षा, धार्मिक परंपरा का संरक्षण, धर्मशास्त्रीय अध्ययन और धार्मिक सभा जैसे गतिविधियां जारी रहेंगी पर विदेशी धन का उपयोग धर्मांतरण से जुड़े कार्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 तथा सर्वोच्च न्यायालय के प्रसिद्ध रेब स्टैंड लॉस बनाम मध्य प्रदेश राज्य फैसले के भावना के अनुरूप माना जा रहा है। उस निर्णय में, न्यायालय ने कहा था कि धर्म का प्रचार करने का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को धर्मांतरित करने का अधिकार नहीं देता है। सरकार का मानना है कि यह प्रावधान विदेशी वित्तपोषण के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को रोकने में मददगार साबित होगा, हालांकि नागरिक अधिकार समूह का कहना है कि इस प्रावधान की इसकी व्याख्या और क्रियान्वयन में संतुलन और सावधानी आवश्यक होगी ताकि वैध धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधि प्रभावित नहीं हो। इन संशोधन का एक उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन के बीच पारदर्शिता को बढ़ाना भी है। डिजिटल युग में वित्तीय लेनदेन और सामाजिक गतिविधि के बेहतर रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया है। इससे विदेशी धन के स्रोत और उसके उपयोग का अधिक सटीक आकलन संभव होगा। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के उल्लंघन के लिए दंड प्रावधान में भी संशोधन किया गया है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड व्यवस्था नियम का बैलेंस सूचित करने में मदद करेगा, पर कई संगठन का तर्क है कि इससे अनुपालन संबंधी लागत और प्रशासनिक बोझ बढ़ जाएगा।
बड़े और संसाधन संपन्न संगठन नई प्रक्रिया और तकनीक जरूरत को अपेक्षाकृत आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके विपरीत छोटी और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले संगठन के सामने अधिक चुनौती होगी, खासकर आदिवासी क्षेत्र ग्रामीण इलाका, महिला सशक्तिकरण, मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले अनेक संगठन सीमित संसाधनों के साथ काम करते हैं। एफसीआरए के नए नियम एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़ा करता है, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित रखा जाए। नागरिक समाज की स्वतंत्रता को कैसे संरक्षित रखा जाए? सरकार का दृष्टिकोण है कि विदेशी धन से संचालित गतिविधि की निगरानी लोकतांत्रिक शासन और राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए आवश्यक है, वहीं नागरिक समाज संगठन का मानना है कि अत्यधिक नियंत्रण स्वतंत्रता विकास कार्यों की क्षमता तक सीमित करता है।