अर्बन हिट आइलैंड क्या है? वर्तमान में भारत में कैसे प्रभाव डाल रहा है.
Vinay singh Vinayiasacademy.com
इस पर चर्चा कीजिए .
आधुनिकता और अनियंत्रित विकास के इस दौर में महानगर रहने लायक ठिकाने कम और तपता तवा अधिक बन चुका है। बुनियादी ढांचे का चरमरा जाना ही अर्बन हिट आईलैंड, शहरी उष्मा द्वीप के रूप में जाना जा रहा है .पानी का गंभीर संकट और उस पर बेहिसाब बिजली कटौती इस सब ने मिलकर एक अर्बन हिट आइलैंड का जन्म दिया है। प्रकृति का यह नियम है कि सूर्यास्त के बाद धरती ठंडी होती है और रात में सकून होता है पर महानगर में यह प्राकृतिक चक्र ध्वस्त हो चुका है. जिसका मुख्य कारण ही अर्बन हीट आईलैंड है और इसका प्रभाव है। जब किसी शहर में पेड़ पौधों, तालाब खाली जमीन को खत्म कर वहां सड़क कंक्रीट की बहुमंजिला इमारत और कांच से ढके टावर खड़े कर दिए जाते हैं, तो वे दिन भर सूरज की गर्मी को अपने भीतर सोख लेते हैं। रात के समय जब तापमान कम होना चाहिए, यह कंक्रीट के ढांचे उस शोखी हुई गर्मी को वापस वातावरण में छोड़ना शुरू करते हैं। सेन्टर for साइंस एंड एनवायरनमेंट के द्वारा जो अध्ययन हुआ है उसमें यह पता चलता है कि भारत के बड़े महानगर में रात का तापमान ग्रामीण या खुले क्षेत्र की तुलना में लगभग 7 से 8 °C तक अधिक होता है। इसका अर्थ है कि महानगर में रात दिन से भी अधिक भारी और उसमें उमस भी रहता है। रात की इस उमस में जब बिजली कटौती का झटका लग जाता है तो नागरिक असहाय हो जाते हैं। आईसीएमआर और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ने भी कहा है कि इससे भारत को काफी दिक्कत हो रही है और लोगों को नींद भी सही सही तरीके से नहीं आ रही है, जिससे मानव संसाधन पर प्रभाव पड़ रहा है। शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कोटिसोल भी अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है जिसके कारण लोग अलग-अलग बीमारी का शिकार हो रहे हैं। अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना ब्रेन। स्ट्रोक होना गंभीर डिहाइड्रेशन होना, किडनी का फेलियर होना इसमें वृद्धि हो जाती है। द लेसन प्लेनेटरी हेल्थ में दावा किया गया है कि तापमान में प्रति 1° की वृद्धि से मानसिक स्वास्थ्य समस्या और अवसाद के मामले में 2% से अधिक की वृद्धि होती है, तो लोगों को भारी नुकसान हो जाएगा।

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