रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया का एनपीए निरीक्षण रिपोर्ट को लेकर चर्चा क्यों है ? इसका क्या प्रभाव पड़ेगा ?
Vks Vinayiasacademy.com रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने कहा है कि आरटीआई act सभी कानून से ऊपर है. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसका उद्देश्य है सुप्रीम कोर्ट ने डिफाल्टर की सूची व निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मंजूरी दे दी है. इसलिए बैंक के अलग-अलग क्षेत्र में 100 एनपीए और जानबूझकर कर्ज ना चुकाने वाले की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर देना चाहिए. लेकिन बहुत से बैंकों का तर्क है की जानकारी की खुलासा से व्यावसायिक हित को नुकसान होगा. बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने rbi की उसे निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दिया है. इस मामले का नतीजा बैंकिंग में पारदर्शिता ,जमा कर्ता के अधिकार और नियामक जवाबदेही पर लंबी अवधि में बड़ा असर डाल सकता है. खासकर जब एनपीए जुर्माना और निरीक्षण पर सार्वजनिक निगरानी बढ़ी हुई है. केंद्रीय सूचना आयोग से संपर्क करके बहुत से बैंकों ने कहा है कि डिफाल्टर एनपीए की सूची जुर्माना और निरीक्षण रिपोर्ट जैसी सूचना को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए लेकिन रिजर्व बैंक आफ इंडिया इसे करना चाहती है

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