डोंबारी बुरु बनेगा बिरसा सर्किट का मुख्य केंद्र
इसी जगह पर आखिरी उलगुलान हुआ था। झारखंड सरकार बिरसा सर्किट के तहत इस ऐतिहासिक स्थल को मुख्य केंद्र के तौर पर विकसित कर रही है खूंटी से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित या पवित्र भूमि है जहां 9 जनवरी 1900 को बिरसा मुंडा के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को ललकारा था और अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग नरसंहार से 19 साल पहले यहां सैकड़ो लोगों को क्रूरता पूर्वक नरसंहार किया था इसके परिसर में एक शिलापट्ट स्थापित है जिस पर 9 जनवरी 1900 के संघर्ष में शहादत देने वाले हाथीराम मुंडा ,हरि मुंडा, सिंगर मुंडा ,बंकन मुंडा की पत्नी, मंजिया मुंडा की पत्नी ,डुंडना मुंडा की पत्नी जैसे वीर शहीदों के नाम अंकित है यहां एक स्तंभ भी स्थापित है इसे पद्मश्री रामदयाल मुंडा ने बनवाया था

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