क्या है झारखंड पेसा नियमावली 2026 में पारित बिल
पेसा नियमावली क्या है ?
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पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को प्रशासन संसाधन और परंपरा पर निर्णय लेने का अधिकार देता है. झारखंड में इसके लागू होने से अब ग्राम सभा सबसे ताकतवर इकाई बन गई है.
ग्राम सभा की बैठक कैसे होगी? 1 महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य होगा. इसके लिए एक तिहाई सदस्य का होना जरूरी होगा. इसमें भी एक तिहाई महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य. बैठक पब्लिक फॉर्म में करना होगा. अगर बंद भवन में बैठक होगा तो उसका दरवाजा खुला रहना चाहिए. किसी को भी बैठक में जाने से नहीं रोक सकते हैं. इसकी अध्यक्षता उसी ग्राम सभा के अनुसूचित जनजाति के कोई ऐसे सदस्य करेंगे जो रीति रिवाज के साथ मान्यता प्राप्त व्यक्ति हो .
पेसा नियम करने से बालू घाट को कौन चलाएगा?
5 हेक्टेयर से कम के बालू घाट का संचालन ग्राम सभा ही करेगी. बालू से मिलने वाला शुल्क ग्राम सभा के कोष में जाएगा. यहां जेसीबी से खनन पर पूरी तरह से रोक रहेगी. एनजीटी के निर्देश के रूप मानसून में बालू की उठाओ पर पूरी तरह से रोक रहेगी.
पेसा नियमावली के बाद शराब दुकानों का क्या होगा?
ग्राम सभा की अनुमति के बिना ना शराब की दुकान खुलेगी और ना ही शराब का फैक्ट्री. महुआ, हडिया जैसी पारंपरिक पदार्थ सिर्फ घरेलू और सामाजिक उपयोग के लिए होगा. शराब नियंत्रण में महिला के निर्णायक भूमिका होगी.

अगर गांव में लड़ाई झगड़ा होता है तो कैसे सुलझाया जाएगा?
पारिवारिक और जमीन विवाद ग्रामसभा में ही सुलझा लिया जाएगा .ग्राम सभा अधिकतम ₹2000 तक का जुर्माना लगा सकती है लेकिन उसे जेल भेजने का अधिकार नहीं होगा. अगर कोई आरोपी अपनी भूल स्वीकार करके क्षमा मांगता है और दोबारा गलती नहीं करने का प्रतिज्ञा लेता है तो उसे ही एक दंड मान लिया जाएगा. पेसा नियमावली के बाद झारखंड में पुलिस प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा ?
पुलिस अगर किसी मामले में किसी को तत्काल गिरफ्तार करती है तो 7 दिन के भीतर सूचना ग्राम सभा को देना ही पड़ेगा .
पेसा नियम के बाद सीएनटी जमीन ट्रांसफर में क्या बदलेगा?
सीएनटी और एसपीटी एक्ट से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की सहमती जरूरी होगी. आदिवासी जमीन पर सीएनटी की धारा 71 का उल्लंघन कर कोई कब्जा कर लेता है या धारा 46 या धारा 48 या 239 का उल्लंघन करके जमीन ले लेता है तो ऐसे जमीन से उसे बेदखल कर दिया जाएगा .इसके बदले कब्जाधारी को किसी भी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा. संबंधित जमीन मूल रैयत या उसके वारिस को सौंप दिया जाएगा. अगर कोई वारिस ना हो तो वह जमीन दूसरे आदिवासी रैयत के नाम बंदोबस्त किया जाएगा. हर साल 15 अप्रैल तक रजिस्टर दो की कॉपी ग्रामसभा को उपलब्ध करवानी पड़ेगी.
क्या ग्राम सभा एक स्थाई बॉडी होगी ?
ग्राम सभा को अब वास्तविक अधिकार मिल गया है जिसे जल जंगल और जमीन का अधिकार कहते हैं .ग्राम सभा के पारंपरिक अधिकार एवं वैधानिक अधिकार के तौर पर लागू करने के लिए प्रशासन हो जाएगा .ग्राम सभा के गठन का अधिकार सरकार और प्रशासन को नहीं दिया गया है जो परंपरागत ग्राम सभा की मान्यता है वही लागू रहेगी. इनमें जनसंख्या का कोई मतलब नहीं है अनुसूचित क्षेत्र के विकास भी ग्राम सभा के ही अधीन होगा .खास बात यह है कि ग्राम सभा स्थाई होगी क्योंकि यह पारंपरिक ग्राम सभा है इसे कभी भंग नहीं किया जा सकेगा .एक-एक योजना ग्राम सभा के अनुमति से ही राजस्व ग्राम में लाया जाएगा. यहां तक की कोई भी छोटी बड़ी कंपनी बिना ग्राम सभा के जमीन तक नहीं ले सकती है .
पेसा कानून का मूल उद्देश्य क्या है ?
पैसा का मूल उद्देश्य ही पांचवी अनुसूची क्षेत्र में निवास करने वाले ग्रामीणों को अधिकार देना और ग्राम सभा को सशक्त करना है. ग्राम कोष का गठन करना है जो भी इनकम होगा पंचायत समिति उसका 80% ग्राम कोष में डालेगी और 20% पंचायत समिति के पास होगा. तीन व्यक्ति तीन साल के लिए मनोनीत होंगे जो ग्राम कोष का संचालन करेंगे. मिट्टी पत्थर बालू मोरम सहित क्षेत्र में पाए जाने वाले लघु खनिज का भी उपयोग पूरी तरह इसके पास ही होगा सिंचाई का प्रबंध करना ग्राम स्तर पर वन उत्पाद एवं अनुपात का अधिकार देना वन्य जीव के संरक्षण का काम भी ग्राम सभा को ही मिलेगा.

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