संथाली भाषा ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष vinayiasacademy com
संथाली भाषा
संथाली एक प्रमुख आदिवासी भाषा है।
यह ऑस्ट्रोएशियाटिक (Austroasiatic) भाषा परिवार की मुंडा शाखा से संबंधित है।
भारत में संथाल समुदाय द्वारा बोली जाती है।
- ओलचिकी लिपि (Ol Chiki Script)
ओलचिकी संथाली भाषा की स्वदेशी लिपि है।
इसका विकास पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 ई. में किया था।
इसे ओल चेमेंत (Ol Cemet) भी कहा जाता है। - ओलचिकी की विशेषताएँ
इसमें कुल 30 अक्षर होते हैं:
6 स्वर (Vowels)
24 व्यंजन (Consonants)
यह लिपि ध्वन्यात्मक (Phonetic) है, यानी जैसे बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है।
इसमें मात्रा प्रणाली नहीं होती, हर ध्वनि का अलग अक्षर होता है। - संथाली भाषा का भौगोलिक विस्तार
संथाली भाषा मुख्य रूप से इन राज्यों में बोली जाती है:
झारखंड
पश्चिम बंगाल
ओडिशा
बिहार
असम
छत्तीसगढ़ - संवैधानिक मान्यता
संथाली भाषा को 2003 में भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया गया।
यह अब एक मान्यता प्राप्त भारतीय भाषा है। - शिक्षा और साहित्य
झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्कूलों में ओलचिकी में पढ़ाई होती है।
संथाली में कविता, कहानी, नाटक और धार्मिक ग्रंथ उपलब्ध हैं।
पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा लिखित प्रसिद्ध ग्रंथ:
“हेर होपोन”
“बिदु चन्दन”