चर्चा में क्यों -हाल के दिनों में विभिन्न देशों की रक्षा व्यवस्था को लेकर पूरे विश्व में उपाय खोजे जा रहे हैं इसी दौरान भारत की रक्षा और सुरक्षा की व्यवस्था भी बेहतर हुई है.
परिचय -पिछले एक दशक में भारत ने अपनी रक्षा क्षमता, आत्मनिर्भर उत्पादन और रणनीतिक सुरक्षा नीति में एक प्रगति दर्ज किया है. रक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, स्वदेशी उत्पादन में उछाल और अच्छा निर्यात के नए कीर्तिमान ने देश की सुरक्षा स्थिति को और भी मजबूत कर दिया है. सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत ने अपनी फाइव रेड लाइन तय कर दी है.
भारत की रक्षा नीति में स्पष्ट है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति होगी जहां वर्ष 2014-15 में रक्षा उत्पादन 46429 करोड़ का था रक्षा बजट 2013-14 में 253 हजार करोड़ का था रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ का था वही 2024 25 में रक्षा उत्पादन 150000 करोड़ का है रक्षा बजट 2025 26 में 681 हजार करोड़ का है और अच्छा निर्यात 2024 25 में 23622 करोड़ का है. भारत ने अपनी फाइव रेड लाइंस में आतंकी हमलों का सख्त जवाब देना ,परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करना, आतंकी और उनके संरक्षक में कोई भेद नहीं रखना, किसी भी वार्ता में आतंकवाद को प्राथमिक मुद्दा बनाना ,भारत के संप्रभुता पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना शामिल है.
वहीं दूसरी और भारत सरकार ने अपने कूटनीति के माध्यम से यूरोप एवं अमेरिका, रूस के बीच एक सामंजस्यपूर्ण बैठाया है .इजराइल एवं पश्चिमी एशिया के देश को एक साथ भारत की रक्षा नीति स्पष्ट रही है .भारत की नई कूटनीति ने चीन रूस और भारत का एक समीकरण भी तैयार किया है. जिसके चलते भारत विश्व के महाशक्ति के बीच बैलेंस करने में काफी हद तक सफल रहा है