भारत का 45वाँ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल – सारनाथ (2026)
क्यों चर्चा में?
सारनाथ (उत्तर प्रदेश) को वर्ष 2026 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) की सूची में शामिल किया गया।
यह घोषणा यूनेस्को विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee) के 48वें सत्र में बुसान (दक्षिण कोरिया) में की गई।
इसके साथ ही भारत के कुल UNESCO विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 45 हो गई।


सारनाथ का परिचय
स्थान: वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से लगभग 10 किमी दूर।
सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
लुम्बिनी – जन्म
बोधगया – ज्ञान प्राप्ति
सारनाथ – प्रथम उपदेश
कुशीनगर – महापरिनिर्वाण


ऐतिहासिक महत्व
ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया।
इस प्रथम उपदेश को धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त (Dhammacakkappavattana Sutta) कहा जाता है, जिसका अर्थ है “धर्मचक्र को गति प्रदान करना”।
यहीं पर बुद्ध ने बौद्ध संघ (Sangha) की स्थापना की।


सारनाथ के प्रमुख स्मारक
धमेख स्तूप – बुद्ध के प्रथम उपदेश का स्मारक।
चौखंडी स्तूप – बुद्ध और उनके प्रथम पाँच शिष्यों के मिलन का स्मारक।
अशोक स्तंभ – सम्राट अशोक द्वारा निर्मित; इसका सिंह शीर्ष (Lion Capital) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
मूलगंध कुटी विहार।
सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय।


UNESCO के बारे में
पूरा नाम: United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization
स्थापना: 1945
मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस
इसका उद्देश्य विश्व की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है।
उत्तर प्रदेश के UNESCO विश्व धरोहर स्थल
ताजमहल
आगरा किला
फतेहपुर सीकरी
सारनाथ (2026)

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