औद्योगिक सब्सिडी से आप क्या समझते हैं? क्या यह भारत के लिए विश्व के चुनौती के सामने बेहतर विकल्प है?
Vinay singh Vinayiasacademy.com
भारत की व्यावहारिक रणनीति 5 स्तंभ पर आधारित होती है। एक सक्रिय सब्सिडी निगरानी प्रकोष्ठ जो आयात प्रधान क्षेत्र पर नजर रखे, सम्भावित विकृति की पहचान करे और व्यापारिक सुरक्षा उपाय के लिए प्रमाणिक दस्तावेज तैयार करें .जिन वस्तुओं का हम भारी मात्रा में आयात करते हैं, यदि उन्हें उनके मूल देश में सरकारी सब्सिडी मिल रही है तो हमें तुरंत इस पर ध्यानदेना चाहिए. दूसरा भारत को रणनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धी उन क्षेत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए जहां स्केल इकोनॉमी यानी कि बड़े पैमाने पर उत्पादन से होने वाला संभावित लाभ वाली अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती प्रदान करती हो। तीसरा भारत को सार्वजनिक वित्त का उपयोग गैर प्रतिस्पर्धी उत्पादन को बनाए रखने के बजाय लॉजिस्टिक ,बिजली लागत, भूमि उपलब्धता और अनुपालन बोर्ड जैसी मूलभूत बाधा को कम करने के लिए करना चाहिए। चौथा वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़े सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग के लिए ऋण गारंटी निर्यात, वित्त और तकनीकी उन्नयन सहायता का विस्तार किया जाना चाहिए।पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण भारत को विश्व व्यापार संगठन और अन्य मंच पर उन देशों के साथ सक्रिय सहयोग बढ़ाना चाहिए जो सब्सिडी की पारदर्शिता और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर एक समान चिंता रखते हैं।यह उपाय प्रत्यक्ष सब्सिडी के दौड़ में शामिल होने की तुलना में अधिक उपयुक्त है, क्योंकि भारत की आधारभूत संहिता को यह मजबूत करेंगे.
भारत का पड़ोसी राष्ट्र चीन के घरेलू नीति को सीधे बदला नहीं जा सकता है, पर व्यापक अंतर्राष्ट्रीय वातावरण को पारदर्शिता, रिपोर्टिंग, मानक और सब्सिडी अनुशासन के लिए गठबंधन निर्माण के माध्यम से प्रभावित किया जा सकता है। भारत का हित इसमें है कि बहुपक्षीय मंच पर अनुदान कर व रियायती लोन और राज स्वामित वाले उद्यमों से जुड़ी सहायता के बेहतर प्रकृतिकरण की मांग किया जाए। इसके साथ भारत उन साझेदार देश के साथ संबंध गहरा कर सकें जो समान बाज़ार दबाव का सामना कर रहे हैं। भारत के पास पहले से व्यवसाय को समर्थन देने वाली कई नीतियां, पहला कदम व्यापारिक सुरक्षा, एंटी डैम्पिंग शुल्क, प्रतिकारी शुल्क, संरचनात्मक कार्रवाई तथा उन क्षेत्र में आयात वृद्धि की करीबी निगरानी जहां सब्सिडी से उत्पन्न बदलाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। दूसरा क्षेत्र अवसंरचना, लॉजिस्टिक, बिजली की विश्वसनीयता, कौशल विकास, परीक्षण, सुविधा मानक और टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए सरकार मदद बढ़ा सकती है।