साइबर सुरक्षा में क्लाउड मिथोस एआई मॉडल क्या है? विश्लेषण करें।
Vinay singh Vinayiasacademy.com क्लाउड मिथोस एंथ्रोपिक का नवीनतम अत्यन्त उन्नत और शोध स्तरीय एआई मॉडल है। इसकी क्षमता को 3 प्रमुख श्रेणी में बांटा जा सकता है जटिल तर्क क्षमता, मानव स्तरीय समस्या समाधान और उच्च स्तरीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कौशल। इसे चैट जीपीटी 5 ,जैमिनी, 3 तथा क्लाउड opus जैसे उन्नत मॉडल से भी अधिक सक्षम बताया जा रहा है। यहां प्रश्न यह है कि आखिर एंथ्रोपोकिक अपनी तकनीक से इतना चिंतित क्यों है? उसने इसे आम जनता के लिए जारी क्यों नहीं किया है? हाल ही में, कई कंपनी ने घोषणा किया कि वह क्लाउड मिथोस रिव्यू को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराएगी क्योंकि उसे आशंका है कि यह साइबर सुरक्षा जगत में अस्थिरता पैदा कर देगा, यहां तक कि देशों को डिजिटल अवसंरचना के लिए भी खतरा बन जाएगा। इस मॉडल का क्षमता दुनिया के सबसे सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम में गिना जा रहा है। इसके द्वारा कई अतिरिक्त लिंक्स हैं जो दुनिया के अधिकांश सर्वर को संचालित करता है। यह मॉडल कई कमजोरी को जोड़कर साधारण उपयोगकर्ता स्तर की पहुंच से पूरे सिस्टम पर रूट एक्सेस प्राप्त करने में सक्षम है। इसके अनुसार कंपनी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और संरचना का निर्माण और रखरखाव करेगी। इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि मिथोस साइबर सुरक्षा खामियों की पहचान और उनके समाधान में उपयोगी होता है। इससे प्रारंभिक स्तर पर कमजोरी का पता लगाया जाएगा। खतरों का तेजी से जवाब दिया जाएगा। डेटा चोरी रोकी जाएगी और महत्वपूर्ण और संरचना की सुरक्षा मजबूत होगी। किसी भी नई तकनीक का दुरुपयोग उसके लाभकारी उपयोग से पहले शुरू हो जाता है। केवल अमेरिका में ही इंटरनेट अपराध में 2025 तक लगभग $31000000000 का नुकसान हुआ। वैश्विक स्तर पर, सायबर अपराध से होने वाले नुकसान एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। पिछले वर्ष दुनिया भर की 63% वित्तीय कंपनी रेसम वेयर हमलों का शिकार हुई। भारत में साइबर सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति में कार्यरत सट इन इंडिया कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने लगभग 3000000 साइबर घटना को संभाला। प्रतिदिन 8000 से अधिक साइबर अपराध की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज किया जा रहा है। अधिकांश बैंक अभी भी पुरानी अवसंरचना, पुरानी कोडिंग सिस्टम और विभिन्न पुराने सॉफ्टवेयर पर निर्भर है, इसलिए क्राउड मिथस(mithos) जैसे उन्नत एआई मॉडल इन कमजोरी का लाभ उठाएंगे। इसी कारण भारत सरकार, बैंकिंग, दूरसंचार और विद्युत ग्रिड जैसे क्षेत्र में विदेशी सर्वर पर निर्भरता कम होगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार अमेरिका के साथ प्रोजेक्ट ग्लॉसविंग के तहत क्लाउड मिथोस तक न्यायसंगत पहुंच को लेकर भी बातचीत कर रही है ताकि देश की बैंकिंग प्रणाली, दूरसंचार नेटवर्क और बिजली ग्रिड की चुनौती के लिए तैयार किया जा सकें। वैश्विक स्तर पर, 10% से अधिक राज्य प्रायोजित एडवांस बसिस्टेंट थ्रेट हमले भारत को निशाना बनाते हैं, इसलिए भारत में इसे लाना बहुत ही जरूरी है।