मकर संक्रांति क्या है? यह कब लागू होता है ?
Vks Vinayiasacademy.com पुस् महीने में जब सूर्य भगवान धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इस दिन को मकर संक्रांति कहते हैं. ज्योतिष विद कहते हैं कि जब सूरज मकर राशि में होते हैं तभी समय सभी दिन एवं सभी स्थान शुभ हो जाता है. मकर संक्रांति के शुभ दिन से खरमास माह में रुके हुए मंगल कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं. सूर्य के उत्तरायण होने से यह देवताओं का दिन माना जाता है .इसमें स्नान, दान जप ,हवन और श्रद्धा का पुण्य फल मिलता है .मकर संक्रांति दिन और रात दोनों का उत्सव है. सुबह से ही स्नान, ध्यान और दान का कार्यक्रम शुरू हो जाता है .यह त्यौहार यौवन को जगाता है .बचपन को मनाता है. प्रौढ़ को बताता है और बुढ़ापे को सताता है .इतना मंगलकारी है कि और कोई कामना की इच्छा नहीं रहती .यह शिशिर के चित्र वसंत के मिठास की संधि है. यह उत्सव आकाश और धरती का मिलन है .उत्सव धर्म देश में राष्ट्रीय पर्व का कोई आधार हो तो वह मकर संक्रांति ही है ,जो राष्ट्रीय त्योहार है इसलिए यह देवताओं का भी नूतन दिवस होता है .जहां संक्रांति है ,वहां तिल है ,गुड़ है, चूड़ा और दही है ,दान है, स्नान है और संघ में उत्सव का आनंद है .खिचड़ी है जो सभी अन्य का समीकरण है जो पककर हमारे जीवन और शरीर के लिए भोजन हो जाता है ,संक्रांति भारतीय लोक में शास्त्रीयता का अनुष्ठान है तो राष्ट्रीय जीवन में लोक का उत्साह है. मकर संक्रांति धर्म के चारों आयाम से जुड़ा है .इसमें धर्म है, जहां स्नान ,ध्यान और पूजा पाठ का विधान है इसमें संस्कृति है. जिसमें प्रकृति नृत्य और संगीत का सतरंगी जीवन खानपान की समृद्ध परंपरा है .इसमें ज्योतिष और खगोल शास्त्र का पाठ है. माघ संक्रांति रितु नक्षत्र उत्तरायण आदि विभिन्न नाम की गांठ है .इसके बाद लोक और व्यवहार के साथ विज्ञान और बुद्धि का संजोग है. इसमें नई फसल, नए दिन, नवीन अवसर और नव गति का प्रयोग शामिल होता है. रितु के साथ परिवर्तन होता है लेकिन परिवर्तन को उत्सव और रचना धर्मिता का रूप केवल मकर संक्रांति में ही मिलता है. इस परिवर्तन के साथ जगत की सारी क्रियाएं बाहर में की जाती है लेकिन इस क्रिया की प्रतिक्रिया हमारे अंतर मन और अंतर जगत में होती है .शिशिर वसंत और ग्रीष्म ऋतु में सूर्य उत्तरायण होते हैं. हिंदू परंपरा में यह समय देवताओं का दिन माना गया है .वर्षा शरद और हेमंत इन तीन ऋतु में सूरज दक्षिण यान होते हैं ,उसमें देवता की रात्रि होती है .उत्तरायण से प्रतिदिन जल के एक बूंद के बराबर दिन की वृद्धि और रात्रि में कमी होती है .यह बात दक्षिणायन में विपरीत क्रम में होती है अर्थात दिन घटता है और रात बढ़ती जाती है. मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी सूर्य से निकलकर बाहर आया एवं स्वतंत्र अस्तित्व लेकर महाकाल में स्थित हुआ .अतः मकर संक्रांति धरती का प्रथम दिन भी है .मकर संक्रांति से यात्रा शुरू करके धरती का सूर्य के चारों ओर जो प्रदर्शन होती है, मानो धरती अपने जन्मदाता भगवान सूर्य के प्रति श्रद्धा निवेदित कर रही हो.