झारखंड में चींटी की चटनी कैसे बनाई जाती है? झारखंड के प्रमुख व्यंजन कौन-कौन से हैं? झारखंड में धुस्का ,पीठा, अरसा, मड़वा छिलका ,demta चींटी की चटनी .रगड़ा, मार जोड़, महुआ लड्डू ,डंबू पीठा, देसी मांस मछली कब और कैसे बनाया जाता है?
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झारखंड में धुस्का -चावल उड़द दाल और चना दाल को पीसकर पेस्ट बनाकर तेल में डीप फ्राई करके बनाया जाता है. यह घुघनी या मीट के साथ खाया जाता है.
इसी प्रकार से झारखंड में पीठा- चावल के आटे से बनता है और इस सर्दी के मौसम में खाया जाता है .मकर संक्रांति के समय इसे बनाया जाता है जिस में गुड़ और नारियल की फीलिंग होती है .
अरसा- यह राज्य का सबसे प्रसिद्ध स्वीट डिश है. जिसे चावल और गुड़ से बनाते हैं. Dheki या कल में कूट कर जो चावल निकलता है उसको गुड़ की चाशनी बनाकर सखुआ के पत्ते पर रख कर इस तेल में छाना जाता है .
इसी प्रकार से मडुवा छिलका- आयरन से भरपूर सर्दी के मौसम में मुख्य व्यंजन होता है. इसकी रोटी बनाई जाती है. जाड़े में ठंड से बचने के लिए भी लोग इसे खाते हैं .
रोग से लड़ने की क्षमता और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट के कारण demta चींटी पेड़ के ऊपर रहती है लोग इसकी चटनी बनाकर खाते हैं .कोरोना के समय से खाकर लोग बीमार नहीं पड़े थे .
बरसात के आई झारखंड में रगड़ा(rugda) की बहार आ जाती है साल पेड़ के नीचे पाया जाने वाला यह rugda ₹3000 प्रति किलो तक बिक जाता है. इसका अनोखा स्वाद लोगों को बहुत अच्छा लगता है.
Madjhor- इसे सूक्ति tiyan भी कहते हैं यह पारंपरिक आदिवासी व्यंजन है. यह एक तरह का सूप है जिसमें हरी पत्तेदार सब्जी और स्टार्च बनकर मिलाया जाता है .
महुआ लड्डू -यह झारखंड में महुआ फूल से बनाया जाता है और इसे सुखाकर पीसकर लड्डू तैयार होता है.
डंबू पीठा- यह ग्रामीण क्षेत्र में खाया जाता है सबसे प्राचीन व्यंजन है.

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