अमेरिका की नई वीजा नीति क्या है? इससे भारत में क्या असर पड़ेगा? h1b वीजा क्या होता है ?गोल्ड कार्ड और प्लेटिनम कार्ड विजा क्या है?
अमेरिका की वीजा नीति एक बार फिर से चर्चा में है क्योंकि प्रतिवर्ष इसमें शुल्क 100 गुना अधिक की वृद्धि की गई है. अमेरिका के द्वारा यह कहा गया है कि वह मेक अमेरिका ग्रेट अगेन नीति को लागू कर दिया है. जिसमें स्थानीय नौकरी को प्राथमिकता दी जा रही है .नए नियमों के मुताबिक h1b वीजा शुल्क 100000 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है जो पूर्व में सिर्फ 5000 अमेरिकी डॉलर था. इस निर्णय से प्रयोगशाला पेटेंट और स्टार्टअप की जो शुरुआत अमेरिका में होनी थी उस पर असर पड़ेगा .सीधे तौर पर इसका असर निम्नलिखित प्रकार से होगा. एंट्री लेवल और मिड लेवल की सैलरी का बड़ा हिस्सा शुल्क में जाएगा. टीसीएस इंफोसिस कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनी को उतना नुकसान नहीं होगा लेकिन छोटी-छोटी कंपनी बंदी के कगार पर चले जाएंगे. भारत पर 1 वर्ष में 53000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ आ जाएगा. सभी फ्लाइट के टिकट अब महंगी हो जाएंगी. सिलिकॉन वैली अमेरिका में रहना अब मुश्किल होगा .अगर वेतन के रूप में नई फीस को देखा जाए तो h1b औसत वेतन 149000 है लेकिन वीजा का फीस लगभग उतना ही हो जाएगा जितना कि किसी को वेतन मिलता है. अमेरिका के राष्ट्रपति ने गोल्ड कार्ड वीजा की शुरुआत की है, जिसमें विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने वाली कंपनी करीब 16.6 करोड़ चुकाकर वीजा प्रक्रिया तेज कर सकती है. वेरिफिकेशन और वार्षिक मेंटेनेंस फीस भी देना होगा. कार्ड को एक कर्मचारी से दूसरे कर्मचारियों को ट्रांसफर भी किया जा सकता है जो आवेदन कर रहे हैं, उन्हें 8.3 करोड़ जमा करना होगा .नॉन रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस देना पड़ेगा और विस्तृत बैकग्राउंड की जांच होगी. अमेरिका के सभी 50 राज्य और जितने भी टेरिटरीज है उसमें काम करने की और यात्रा की सुविधा भी मिलेगी. ट्रंप ने गोल्ड वीजा के साथ प्लेटटिनम कार्ड की भी योजना शुरू की है. जिसमें 41.5 करोड़ देकर आवेदक वेटिंग लिस्ट में आ सकते हैं. जांच पड़ताल के बाद कार्ड होल्डर को 270 दिन तक रहने और नॉन USA इंकम में छूट मिलेगी.
भारत में नकारात्मक असर के साथ-साथ इसका पॉजिटिव असर भी हो सकता है .रियल एस्टेट जैसी बड़ी बाजार में भारत अपना स्वयं का विकास कर सकता है क्योंकि अमेरिका नहीं जाने के बाद लोग भारत में ही अच्छे बिल्डर प्रोजेक्ट में निवेश कर सकते हैं और वहां घर खरीद सकते हैं. भारत में स्टार्टअप की एक लहर की शुरुआत हो सकती है जैसे बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे और भी नए शहर का विकास हो सकता है .इसी प्रकार से भारत में निवेश होगा तो भारत में रोजगार भी बढ़ेंगे और भारत में बेरोजगारी दर घटेगा. उन तकनीक और व्यावसायिक कौशल बढ़ेंगे, जिसकी अमेरिका में ज्यादा मांग हो रही है अब रिमोट या ऑनलाइन काम को ज्यादा प्राथमिकता दिया जाएगा ज्यादा कर्मचारी भारत में ही काम करेंगे.