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लोकपाल का पद चर्चा में क्यों है ?लोकपाल एवं लोकायुक्त की नियुक्ति कैसे होती है ?क्या योग्यता चाहिए? उनके पद से कैसे हटाया जाता है ?लोकायुक्त और लोकपाल के लिए संवैधानिक स्थिति क्या है? विश्व में लोकपाल किन-किन देशों में शक्तिशाली है?vinayiasacademy


लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम भारत में 16 जनवरी 2014 से लागू हुआ ।हालांकि इसके लिए 1968 ईस्वी में संसद में पहली बार विधेयक लाया गया था, फिर कई बार विधेयक में संशोधन किया गया और अंतिम रूप से 17 दिसंबर 2013 को लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक को पारित कर दिया गया।
लोकपाल का कार्य करने का तरीका बिल्कुल अलग है। भ्रष्टाचार की शिकायत पर कार्यवाही में सीबीआई सीवीसी और लोकपाल तीनों की भूमिका एक साथ रहेगी। यह बनाई गयी शिकायत शुरुआती अवस्था में लोकपाल के पास चली जाएगी और अगर सही पता चलता है तो लोकपाल इसे सीबीआई के पास भेज देगा किसी भी मामले की जांच के दौरान सीबीआई की संबंधित मंत्रालय और लोकपाल के प्रति किसी प्रकार की जिम्मेवारी नहीं हो, ना ही उसकी जवाबदेही हो।vinayiasacademy सजा की प्रक्रिया के लिए विशेष अदालत के पास सूची भेजने की जिम्मेवारी लोकपाल की। लोकपाल समय-समय पर सुझाव भी देंगे जो सरकारी कर्मचारी को मानने ही पड़ेंगे ।अगर यह सुझाव क्लास वन और क्लास टू की कर्मचारियों के लिए। वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारी का क्लास थ्री नौकरी के खिलाफ मुख्य सतर्कता आयोग सीवीसी देखेगा ।आयोग द्वारा हर 3 महीने में अपनी रिपोर्ट को जमा करना होगा। मामला को दूसरा गुप्त दस्तावेज इस मामले पर भी लोकपाल की जिम्मेदारी।vinayiasacademy
पूरे विश्व में इस संस्था को ओंबड्समैन के नाम से जानते हैं और अलग-अलग देशों में इसका नाम परिवर्तन भी हुआ है। सबसे पहले लोकपाल की संकल्पना स्वीडन देश में आई थी 1809 ईस्वी में ।बाद में नॉर्वे एवं फिनलैंड में इसे अपना लिया गया, 1962 में न्यूजीलैंड में पहली बार अंग्रेजी भाषी कॉम इन लॉ देश था जिसने ओंबड्समैन संस्था का गठन किया।
लोकपाल अथवा लोकायुक्त ऐसे कानून को बनाने के लिए अनुच्छेद 253 और अनुच्छेद 252 का प्रयोग किया जाता है। कि अनुच्छेद 253 संघीय ढांचे को लेकर है इसलिए इसके जगह पर 252 का प्रयोग किया जाता है। अनुच्छेद 252 में यह बताया गया है कि अगर कोई दो राज्य केंद्र से आग्रह करें तो संसद एक मॉडल केंद्रीय कानून बनाया जा सकता है। राज्य सरकार को विकल्प होता है, वह या तो उसी कानून को अपना ले या फिर कोई दूसरा कानून बना ले।


अगर कोई कानून किसी देश में पूर्ण रुप से लागू करना है और पूरे भारत के लिए बनाना है तो उसके लिए अनुच्छेद 253 के द्वारा संविधान संशोधन किया जाता है। राज्यों को ऐसा कानून मानना ही पड़ता है।vinayiasacademy
अगर सांसदों के खिलाफ आरोपपत्र है और संसद में कार्यवाही नहीं हो रही है तो यह मामला लोकपाल के पास जाएगा। इसे लेकर अभी हाल के वर्षों में चर्चा हो रहा है कि यह सही है या गलत है। धारा 24 में यह कहा गया है कि किसी भी सांसद के खिलाफ अगर आरोप पत्र दाखिल होता है तो लोकपाल उसकी कार्यवाही रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से मांगेगा ।एक निश्चित अवधि में उस सांसद के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने पर लोकपाल सीधे राज्यसभा सभापति लोकसभा अध्यक्ष। कार्यवाही नहीं करने का कारण पूछेगा इसलिए भी लोकपाल इन दिनों चर्चा में है।
भारत में जब 1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग बना था उसी समय लोकपाल की वकालत कर दी गई थी। प्रशासनिक सुधार आयोग के अनुसार राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के खिलाफ लोकपाल की नियुक्ति करना जरूरी। लोकपाल एवं लोकायुक्त स्वतंत्रता के साथ जांच करेंगे ।इनकी जांच गुप्त होगी और यह पद गैर राजनीतिक होगा। इसकी ताकत उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान हो। यह अपने विवेक के अनुसार कार्य करेंगे इसमें किसी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हो उनके पास पूरी शक्ति होगी


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