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1. स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना से क्या समझते हैं?
2. झारखंड में भूमि और पर्यावरण से संबंधित मुद्दे की चर्चा करें।

स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना गरीबों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एक समन्वित कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई। इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे लोगों को रोजगार देना तथा उनको सक्षम और समृद्ध बनाना है। सरकार का उद्देश्य है कि गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों को अच्छा प्रशिक्षण दिया जाएगा । आमदनी बढ़ाने के तरीके बताए जाएंगे ताकि यह लोग अपने आप को मजबूत बना सके और आमदनी बढ़ा कर अपने जीवन यापन को सुधार सकें। ग्राम स्वरोजगार योजना शुरू करने का सरकार का यही उद्देश्य है कि ग्रामीण और गरीब इलाकों की उन्नति की जाए। गरीबों को पोषण युक्त आहार दिया जाए। ग्रामीण इलाकों में भूमि तथा खेतों की किस्मों पर ध्यान दिए जाने के बारे में भी बताया जाता है। इस योजना के तहत 30% की दर से सब्सिडी दी जाती है और ज्यादा से ज्यादा ₹75 का प्रावधान है। अनुसूचित जातियों और विकलांगों के लिए इसकी सीमा 50% रखी गई है। इस योजना के तहत महिलाओं को विशेष प्रावधान है। अकेली महिलाओं को 40% की सब्सिडी दी जाती है।

झारखंड में परिस्थितिकी एवं पर्यावरण का अधिक महत्व है। क्योंकि कुल भौगोलिक क्षेत्र में जनसंख्या का 2.69 करोड़ भार है। कुल वन क्षेत्र 28.4% है। क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन के लिए इसे 33% होना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त यहां खनिज संपदा की प्रचुर मात्रा होने के कारण उत्खनन का भार भी बहुत अधिक है। छोटानागपुर मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र है इन सब कारणों से यहां की प्रमुख नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है। जिसे झारखंड के कुछ भाग काफी प्रभावित हो रहे हैं। इंसाफ आपदाओं से प्राकृतिक संसाधनों को बचाने तथा बढ़ाने में पारिस्थितिकी और पर्यावरण के ज्ञान का प्रसार जरूरी है इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विभाग ने का कार्य किए हैं।। आने वाले समय में झारखंड को इस प्राकृतिक स्वरूप को बचाने तथा सामान्य में हम सभी को योगदान करना होगा। इसके लिए पारिस्थितिकी का ध्यान रखें तथा जंगल के शुद्ध वातावरण प्रदूषित जल तथा वायु को कायम रखते हुए उन्नत कृषि तथा सुखी जीवन व्यतीत करने में हमें योगदान देना चाहिए। इसके लिए दिए गए सुझावः

  1. सभी परती भूमि पर वृक्षारोपण करें, 2.अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर वृक्षों की प्रजातियों का चुनाव करें, 3.भू एवं जल संरक्षण की समस्याओं से निपटने हेतु विशेषज्ञों से सलाह लेकर वृक्षारोपण करें,। 4.गत 100 वर्ष से मनुष्य की जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है इसके कारण अन्य जल घर बिजली सड़क वाहन और अन्य वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि हुई है। 5.परिणाम स्वरूप हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर काफी दबाव पड़ रहा है और वायु जल तथा भूमि प्रदूषण लगातार बढ़ता चला जा रहा है हमारी आज भी आवश्यकता है कि विकास की प्रक्रिया को बिना रोके अपने महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को खराब होने और इनके अपक्षय को रोके। 6.पर्यावरण प्रदूषण और महत्वपूर्ण संसाधनों से संबंध मुख्य समस्याएं स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर से लेकर विश्व स्तर पर अलग-अलग है। 7.वायु प्रदूषण मुख्य रूप से उद्योगों तथा स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला तथा पेट्रोलियम के जलने से होता है। यह मनुष्य जानवरों तथा पौधों के लिए हानिकारक होता है । आसपास के वायु को स्वच्छ रखने के लिए इनको हटाना जरूरी है। 8.वैश्विक प्रकृति की दो मुख्य पर्यावरणीय समस्या है ग्रीन हाउस के बढ़ते हुए प्रभाव जिसके कारण पृथ्वी पर गर्मी बढ़ रही है और समताप मंडल में ओजोन का अवक्षय हो रहा है।

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